पुलिस और प्रशासन के अफसर तेल माफिया से याराना निभा रहे थे। मनोज गोयल की पार्टनरशिप वाले पेट्रोल पंप पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सुजीत प्रधान के पंप पर भी केवल चेकिंग की खानापूरी हुई। छापामार दल गठित किए गए लेकिन सिर्फ कागजों में।
रिफाइनरी से तेल चोरी का खुलासा होने के बाद ये साफ हो गया था कि मनोज गोयल और इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के पंपों पर तेल बेचा गया है। मथुरा में भी सौंख रोड पर मनोज गोयल का पार्टनरशिप में एक पेट्रोल पंप था। वहीं तेल चोरी के मामले में नामजद सुजीत प्रधान का भी पेट्रोल पंप है।
अधिकारियों ने दावा किया था कि एक पूरी टीम बना दी गई है। यह टीम ही चेकिंग करेगी। लेकिन पंपों पर चेकिंग नहीं की गई। जहां हुई वहां केवल खानापूरी की गई। न तो तेल का स्टाक चेक हुआ और न ही गुणवत्ता को देखा गया। जबकि लखनऊ तक इस तेल चोरी का हल्ला था।
मनोज गिरफ्तार हुआ या फिर खुद ही पहुंच गया
मथुरा। पुलिस को महीने भर तक छकाने वाला तेल माफिया इतनी आसानी से गिरफ्तार हो जाएगा समझ से परे है। पुलिस का कहना है कि हाईवे पर उसे पकड़ा गया लेकिन जिसके पीछे पुलिस लगी हो वो भला यहां क्या करने आएगा। सूत्रों का कहना है कि जब दबाव बढ़ा तो कुछ अफसरों के कहने पर उसकी गिरफ्तारी प्लान कर दी गई। भरोसा दिया गया कि वो पुलिस के पास पहुंच जाएगा तो मदद भी हो जाएगी।
आगरा के नेहरू नगर निवासी मनोज गोयल पेट्रोल पंप व्यवसायी है। उसके होटल और स्कूल भी हैं। 18 फरवरी को रिफाइनरी की पाइप लाइन से तेल चोरी के खुलासे के बाद से पुलिस उसे तलाश रही थी। बाद में एसटीएफ को भी लगा दिया गया था। पुलिस को कभी उसकी लोकेशन वाराणसी में मिल रही थी तो कभी नेपाल सीमा से लगे शहरों में। दिल्ली, मुंबई तक से उसके बारे में सूचनाएं आती रहीं।
लेकिन शनिवार को वो मथुरा में भरतरपुर तिराहे पर ही मिल गया। वह भी आगरा जाते वक्त। हो भी सकता है कि वह अपने घर जा रहा हो। लेकिन जिसके पीछे पुलिस पड़ी हो वो अपने दूर रहने की बजाए भला शहर में क्यों जाएगा। इन सवालों का जवाब न तो पुलिस अधिकारी दे रहे हैं और न ही एसटीएफ वाले।