नरसीपुरम् में आश्रम कब्जाने के लिए महंत का अपहरण कर उसकाफर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र व फर्जी वसीयत बनाने के साथ आश्रम को बेचने का पांच साल पुराना मामला सामने आया है। इस मामले में गुरुवार को महंत के शिष्य ने प्रधान समेत चार लोगों के खिलाफ थाना
रिफाइनरी में मुकदमा दर्ज कराया है। उसका आरोप है कि अप्रैल 2012 में मृत दर्शाए गए अपह्त महंत से आरोपियों ने जुलाई 2012 तक बैंक से सात बार लेन-देन कराया। पुलिस भी अब तक महंत को ढूंढ नहीं पाई है। थाना रिफाइनरी के नरसीपुरम् में परमहंस के नाम से चार
मंजिला आश्रम था। इस आश्रम के महंत प्रह्लाद दास 2012 में गायब हो गए। महंत के शिष्य रांची बांगर निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने कई बार पुलिस से महंत को तलाश करने की गुहार लगाई। लेकिन, पुलिस अब तक महंत को ढूंढ नहीं पाई। पुष्पेंद्र का आरोप है कि अप्रैल 2012 में
नरसीपुरम निवासी महेंद्र धनगर ने ही महंत का मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और फर्जी वसीयत लगा कर आश्रम कब्जा लिया। और जुलाई 2012 तक राधाकुंड स्थित भारतीय स्टेट बैंक से महंत से जबरदस्ती लेन-देन कराया। इसके बाद आश्रम की तीन मंजिल को गिरा
दिया गया है। बाकी बची एक मंजिल भी बेच दी गई। पुष्पेंद्र ने महंत का अपहरण करने के आरोप में सुंदर प्रधान, महेंद्र धनगर, जमुना धनगर एवं बलदेव के गांव बल्टीगढ़ी निवासी योगेश शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। थाना प्रभारी राकेश कुमार का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होगी।