एडीजे षष्ठ के कोर्ट में रात के समय अचानक आग लगा दी गई। आग से एक टेबिल पर रखी दर्जनों फाइलें खाक हो गई। जिन फाइलों को जलाया गया वह उन मुकदमों से संबंधित थी जो इस समय सुनवाई में चल रहे थे और निर्णय के करीब थे। मामले में कोर्ट के क्लर्क ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
न्यायालय परिसर में ऊपरी मंजिल पर एडीजे षष्ठ का कोर्ट है। रविवार को रात में उनके कोर्ट में बीच की मेज पर रखी फाइलों में आग लगा दी गई। सुबह नौ बजे सफाईकर्मी इतवारी लाल और गणेश सफाई करने आए, तब घटना की जानकारी हो सकी। सफाईकर्मियों ने कोर्ट नाजिर को इसकी सूचना दी। सूचना पर सदर पुलिस, न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी, जिला जज दिनेश कुमार सिंह, अन्य न्यायाधीश, एसएसपी डा. राकेश सिंह और सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया।
एसएसपी ने फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया और अलमारी व आसपास के इलाके से नमूने लिए। मामले में कोर्ट के क्लर्क विमल कुमार शर्मा ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। सदर पुलिस ने सफाई कर्मी इतवारीलाल, गणेश कुमार और रात्रि को चौकीदारी करने वाले रमेश चंद्र व धर्मेंद्र को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। एसएसपी डा. राकेश कुमार ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। शीघ्र ही आग लगाने वाले को पकड़ा जाएगा।
मौके से नहीं मिला ताला
मथुरा। सुबह 9:30 बजे जब सदर पुलिस कोर्ट में आग की सूचना पर पहुंची तो कोर्ट के गेट पर लगा हुआ ताला मौके पर नहीं मिला। पुलिस और फारेंसिक टीम ने कोर्ट के मेन गेट का निरीक्षण किया। आग लगाने वाले ताला खोलकर कोर्ट में प्रवेश कर गए थे। कोर्ट के मुख्य दरवाजे को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
एक टेबल की फाइलें पेट्रोल डालकर जलाईं
एडीजे षष्ठ की कोर्ट में फाइलों को आग लगाने वाले ने पेट्रोल का प्रयोग किया। आग लगने के बाद कुछेक कागजों के टुकड़ों से पेट्रोल की महक आ रही थी। कोर्ट के जिस कमरे में आग लगाई गई उस कमरे में अन्य कर्मचारियों की चार टेबल लगी हैं और उन पर दर्जनों फाइलें रखी हैं। किसी भी टेबिल का एक भी कागज नहीं जला। साथ ही मेज की बगल में चार बड़ी-बड़ी लोहे की अलमारी रखी हुई है। अलमारियों के ऊपर भी दर्जनों फाइलेें रखी हैं। किसी फाइल को जलाने वाले ने नुकसान नहीं पहुंचाया। बताया गया है कि जो फाइलों में जलीं उनमें से अधिकतर आपराधिक मामलों से जुड़ी थीं। कुछ केस सुनवाई में चल रहे थे और फैसले के निकट थे।