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जवाहरबाग से जुड़े कई अहम साक्ष्य गायब

Sat, 01 Apr 2017 11:48 PM IST
पुनीत शर्मा
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फाइल फोटो जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
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जवाहरबाग हिंसा से जुड़े कई अहम साक्ष्य गायब हो गए हैं। जवाहरबाग को खाली कराने के लिए डीएम और एसएसपी समेत तमाम दूसरे अफसरों की ओर से किए गए पत्राचार के कई पत्र नहीं मिल रहे हैं। तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी ने जो पत्र उच्चाधिकारियों को लिखे और उच्चाधिकारियों ने जो लिखित आदेश उन्हें दिया था, उनकी कापियां भी गायब हैं। इतना ही नहीं कब्जाधारियों पर निगाह रखने के लिए आसपास जो हाई पावर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे उनकी भी फुटेज अब गायब है।
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रामवृक्ष यादव के कब्जे से जवाहरबाग को खाली कराने के लिए मार्च, 2014 से जून, 2016 तक तैनात रहे अफसरों ने जो भी पत्राचार किया उसकी तमाम कापियां अब नहीं मिल रही हैं। रामवृक्ष को सत्याग्रह के लिए दो दिन की जो अनुमति दी गई थी वह पत्र भी सीबीआई को नहीं मिला है। तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी ने दस से भी ज्यादा पत्र लिखे थे। अधिकारियों ने उन्हें समय-समय पर आदेश दिए थे लेकिन अब सारे के सारे पत्र गायब हैं। शासन से जारी होने वाले पत्र भी नहीं मिल रहे हैं। ये चिट्ठियां कहां गईं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। 

खास बात ये है कि 20 मई, 2016 के करीब जवाहरबाग में कब्जाधारियों की गतिविधियों पर निगाह रखने के लिए हाई पावर वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। 9 कैमरों से भीड़ पर नजर रखी जा रही थी। 2 जून, 2016 को जब जवाहरबाग में हिंसा हुई थी वह भी सब इन कैमरों में कैद हुई होगी लेकिन यह कैमरे भी खाली बताए जा रहे हैं। इन कैमरों में जो फुटेज रिकार्ड थी वह सब गायब है। यह कैसे गायब हुई ये भी जांच का विषय है। यह भी हो सकता है कि सुबूत मिटाने के लिए फुटेज साफ कर दी गई हो। सीबीआई ने अब अपनी जांच में यह बिंदु भी शामिल कर लिया है।
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- जवाहरबाग पर निगहबानी को यहां लगे थे कैमरे
सीएमओ आफिस की छत
तहसील की छत पर
जवाहरबाग कालोनी में
एसएसपी के पुराने कार्यालय पर

सीबीआई को नहीं मिला जवाहरबाग का अनुमति पत्र
जवाहरबाग हिंसा की जांच कर रही सीबीआई ने प्रशासनिक अधिकारियों से वह पत्र मांगा जिसके आधार पर रामवृक्ष को जवाहरबाग में सत्याग्रह की अनुमति प्रदान की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी भी प्रकार के अनुमति पत्र के होने से इंकार किया। अफसरों ने बताया कि जवाहरबाग के लिए कोई अनुमति ली ही नहीं गई थी। जबकि हकीकत यह है कि तत्कालीन अफसरों ने दो दिन की अनुमति दी थी।
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