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भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं बीएसए दफ्तर के बाबू

Sat, 19 Mar 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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पीपीएफ में पैसा लगाने वालों को झटका - फोटो : Reuters
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बीएसए कार्यालय के प्रधान लिपिक कुंजबिहारी के रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकडे़ जाने के बाद शिक्षा विभाग में हर जुबां पर यहां के भ्रष्टाचार की चर्चा है। बीएसए ऑफिस में पूर्व में भी यहां के लिपिक गलत कार्य करने में फंसे हैं और इनमें से कुछ पर कार्रवाई भी हुई है। इसके बाद भी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे लिपिकों ने अपना ढर्रा नहीं बदला। हालात यह थे कि यहां खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही थी।
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केस- एक
करीब एक माह पूर्व नौहझील ब्लॉक के बाबू रुषितमणि पाठक ने शिक्षामित्र से समायोजित शिक्षिका से वेतन और एरियर के भुगतान बिल बनाने के नाम पर दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। लिपिक की यह बात फोन में रिकार्ड कर ली गई थी। इसके बाद बीएसए एके सिंह ने लिपिक को निलंबित कर दिया था

केस- दो
गोवर्धन ब्लॉक के लिपिक रहे महेश शर्मा को तत्कालीन बीएसए राजू राणा ने कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कर शिक्षकों के फर्जी स्थानांतरण करने के आरोप में निलंबित किया था। इसके बाद भी आज वह बीएसए कार्यालय में महत्वपूर्ण पटल संभाल रहे हैं और बीएसए के कृपापात्र बने हुए हैं।
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केस- तीन
जुलाई 2014 में शिक्षामित्रों के पहले बैच के शिक्षक पद पर समायोजन के दौरान लिपिक चरन सिंह ने क्रीमीलेयर के स्कूलों में खाली पदों को छिपा लिया था, ताकि उन पर बाद में अपने चहेतों को तैनाती दिलाई जा सके। इस कारनामे के लिए तत्कालीन बीएसए श्यामप्रकाश यादव ने चरन सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बाद में इस मामले को अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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