नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यमुना किनारे कूड़ा निस्तारण में लापरवाही बरतने के लिए मथुरा छावनी परिषद पर 10 लाख और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर 5 लाख का जुर्माना लगाया है। यह आदेश एनजीटी ने भाजपा नेता तपेश भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने कहा कि तपेश भारद्वाज की याचिका में यमुना में ऑक्सीजन स्तर शून्य होने और कचरे की वजह से उत्पन्न होने वाली बीमारियों का उल्लेख किया था। कहा था कि यहां स्थानीय निकाय ठोस कचरा और खतरनाक कचरे के प्रबंधन में नियमों की पूर्ण अनदेखी कर रहे हैं। बीते दिनों हुई बहस के बाद अपने आदेश में एनजीटी ने इसे गंभीर मामला माना है।
याची के वक्तव्य को सही ठहराते हुए छावनी परिषद और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए कर्तव्यों का बोध कराया। तय किए जुर्माना को जमा करने के लिए एनजीटी ने दो सप्ताह का समय दिया है।
चार सप्ताह के भीतर कचरा स्थल को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने और यहां हरित पट्टी विकसित करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने राज्य सरकार, छावनी परिषद, उत्तर प्रदेश और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह आदेश अक्षरश: लागू करने का भी निर्देश दिया है।