परीक्षित कौशिकगोवर्धन। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दानघाटी मंदिर स्थित गिरिराजजी का अभिषेक सात नदियों गंगा, यमुना, सरयू, गोदावरी, नर्मदा, भरतकूप और मंदाकिनी के जल से होगा। अभिषेक के लिए वृद्ध साधू नदियों से जल को एकत्रित करके ला रहे हैं। 36 वर्षों से प्रमुख त्योहारों पर ब्रज के प्रमुख मंदिरों में गंगा और यमुना जल पहुंचाने की यह सेवा निर्बाध रूप से जारी है।
आगरा जिले की फतेहाबाद तहसील के गांव इनायतपुर निवासी पं. भोगीराम शर्मा के पुत्र पं. रामप्रकाश (77) बचपन से ही गिरिराजजी की भक्ति में डूबे हैं। उन्हें प्रेरणा हुई कि गोवर्धन महाराज का अभिषेक गंगा और यमुना जल से होना चाहिए। तभी से 20-20 लीटर की पांच टंकियों में इलाहाबाद में संगम से गंगाजल लाने की सेवा करने लगे। गंगाजल की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्ष 2009 में उन्होंने छह टायर वाला ट्रक और 12 हजार लीटर क्षमता का एक टैंकर खरीदा। सेवा देख इन्हें लोग ''गंगाजल वाले बाबा'' के नाम से जानने लगे हैं।
बाबा महीने में एक बार छह हजार लीटर गंगाजल और छह हजार लीटर यमुना जल लाकर ब्रज के मंदिरों को निशुल्क उपलब्ध कराते हैं। बरसाना में राधारानी, मथुरा के भूतेश्वर महादेव, गोकुल के कान्हा, महावन के चिंताहरण, बलदेव के दाऊजी महाराज और बरसाना में राधारानी मंदिर पर गंगाजल पहुंचाते हैं। बाद में यह टैंकर गोवर्धन में दानघाटी पर श्रद्धालुओं को जल उपलब्ध कराते हैं।
इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पावन बेला में गोवर्धन में सात नदियों का संगम नजर आएगा। इस बार गिरिराजजी के अभिषेक में का जल प्रयाेग किया जाएगा। इसके लिए तैयारी पूर्ण कर ली गई हैं। संवाद
शासन से कर मुक्त है वाहन
उत्तराखंड में नीलकंठ के नीचे पशुलोक बैराज से गंगाजल लाया जाता है। साथ ही गंगा घाटी ऋषिकेश, प्रयागराज संगम, मंदाकिनी, गुप्त गोदावरी, नर्मदाघाट धुंआधार (जबलपुर) और करनाल में जगाधारी तथा अयोध्या की सरयू नदी से जल लाते हैं। जिस वाहन से यह जल आता है, शासन ने उस वाहन को सभी तरह के कर से मुक्त कर रखा है।
चालक के लिए भी नियम
गंगा और यमुना जल लाने वाले ट्रक व टैंकर पर वही चालक रहता है, जो जनेऊ और कंठी धारण किए हो। उसके लिए धूमपान वर्जित है। आने-जाने के दौरान कहीं भी लघु शंका करने पर उसे स्नान करना पड़ता है।