वृंदावन। जातियों में बंटे हिंदू समाज को एकजुटता के सूत्र में पिरोने के लिए विश्व हिंदू परिषद संतों के सहयोग से व्यापक समरसता अभियान को गति देने की रणनीति पर काम कर रहा है। आगामी 17 अक्तूबर को धार्मिक नगरी में संत समागम से इसकी शुरुआत की जाएगी। इसमें विहिप के राष्ट्रीय पदाधिकारी ब्रज के संतों और धर्म प्रचारकों के साथ विभिन्न बिंदुओं पर गहन मंथन करेंगे।
सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और राष्ट्र रक्षा के मुद्दे पर मुखर रणनीति पर काम करने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद द्वारा एक बार फिर हिंदुत्व की कड़ियों को मजबूत करने की दिशा में निर्णायक भूमिका तैयार की जा रही है। इस बार विहिप की नजर जातियों में बंटे हिंदू समाज को एकजुट करके समरसता का माहौल तैयार करने पर है। जिसका निर्णय संगठन के साठ साल पूरे होने पर आयोजित कोर कमेटी की बैठक में लिया जा चुका है।
संगठन का मानना है कि यह विडंबना ही है कि भगवान राम और भगवान परशुराम को जातियों में बांट दिया गया है। जबकि सनातन संस्कृति का मूलाधार समभाव है। इसी बिंदु को व्यापक स्तर पर देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए संत समाज और धर्म प्रचारकों को इस अभियान से जोड़ने की रणनीति पर काम करते हुए 17 अक्तूबर को ब्रज प्रांत के संतों और धर्म प्रचारकों का समागम समारोह आयोजित किया जा रहा है। इसमें लगभग 500 से अधिक संत-महंत पूरे ब्रज प्रांत से आमंत्रित किए गए हैं।
संगठन के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश समेत अन्य प्रमुख पदाधिकारी संतों से मंथन करेंगे। इस संबंध में विहिप के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य राजकुमार शर्मा ने बताया कि इस संत समागम का आयोजन रुक्मिणी विहार स्थित एसआर फार्म हाउस में किया जाएगा।