मथुरा। बोतल बंद पानी, कोल्ड और सॉफ्ट ड्रिंक से लेकर बाजार में बिक रही कच्ची सब्जियों को खरीदते समय सतर्क रहने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन इनमें मिलावट से आंखें मूंदे बैठा है। बीते एक साल में एक भी नमूना नहीं भरा गया है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि इनमें मिलावट है या नहीं, इसका लोगों को कैसे पता लगेगा। स्वास्थ्य पर इनके सेवन का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो जिम्मेदार कौन होगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की खाद्य पदार्थों की जांच के लिए छापा मारने, नमूने भरने की कार्रवाई देखें तो एक साल में 1654 निरीक्षण किए, 303 स्थलों पर छापा मारा व 438 नमूने विभिन्न खाद्य पदार्थों के भरे। इनमें से 406 की रिपोर्ट मिले, जिनमें 123 नमूने अधोमानक पाए गए, 60 मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताए गए। इतनी बड़ी मिलावटखोरी के बाद भी विभाग का ध्यान सब्जी, बोतल बंद पानी, कोल्ड और सॉफ्ट ड्रिंक की ओर नहीं है। इनका एक भी नमूना एक साल में नहीं भरा गया है।
सब्जियों में सल्फर जैसे घातक तत्व
सब्जियों में खुले तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए घातक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। खेतों के पास से गुजर रहे ऐसे नाले के पानी से सिंचाई, फसल को रोग-कीटों से बचाने के लिए दवा का छिड़काव आदि किया जाता है, जो कि सब्जियों को दूषित करते हैं। रसायन युक्त पानी से उगने वाली सब्जियों में लेड, सल्फर और निकल जैसे घातक तत्व होते हैं। ऐसी सब्जियों का सेवन लोगों को धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है। इतना नहीं मंडियों में लाने के बाद भी सब्जियों को चमकाने व तरोताजा दिखाने के लिए उन पर रसायनों का छिड़काव किया जाता है।
बोतल बंद पानी और कोल्ड ड्रिंक खरीदते समय सजग रहें
गर्मियों के सीजन की शुरुआत हो चुकी है। लोग घर से बाहर होने पर बोतल बंद पानी या कोल्ड ड्रिंक का सेवन खूब करते हैं। जल्दबाजी में न तो इनके ब्रांड या पैकिंग को गौर से देखते हैं और न ही एक्सपायरी तिथि को देखते हैं। इसका लाभ मिलावटखोर उठाते हैं। खाद्य विभाग को नियमानुसार इनकी जांच का अधिकार है, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
कोल्ड ड्रिंक व बोतल बंद पानी के सैंपल एकत्रित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। यह सही है कि गर्मियों में लोग इनका सेवन अधिक करते हैं। ऐसे में बाजार में नकली व एक्सपायरी माल खपाया जा सकता है।
- डाॅ. गौरी शंकर, सहायक आयुक्त खाद्य