मथुरा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड की टीम अब नियमित रूप से औचक निरीक्षण करेगी, ताकि स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति की जांच की जा सके। सीबीएसई ने सभी स्कूलों को पत्र भेजकर 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्र-छात्राओं की सूचना मांगी है।
जिले में सीबीएसई से संबद्ध 135 विद्यालय संचालित हैं। इनमें हाईस्कूल के 12,983 और इंटरमीडिएट के 10,786 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। हाल ही में बोर्ड की टीम ने राजस्थान और दिल्ली के कई स्कूलों का निरीक्षण किया, जहां बच्चों की उपस्थिति कम मिलने पर चेतावनी पत्र जारी किया। बोर्ड के नियमों के अनुसार परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है।
बोर्ड की ओर से सिर्फ आपातकालीन परिस्थितियों में जैसे चिकित्सा, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भागीदारी और अन्य जरूरी कार्यों के लिए 25 प्रतिशत की छूट का प्राविधान है। बशर्ते, इसके आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हों। वर्तमान में डमी स्कूलों के मामलों ने बोर्ड की चिंता बढ़ा दी है। विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के बावजूद हाजिरी लगा दी जाती हैै। विद्यालयों में न आकर बच्चे नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप बोर्ड का रिजल्ट साल दर साल खराब हो रहा है।
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि अगर औचक निरीक्षण के दौरान स्कूल में विद्यार्थी की अनुपस्थिति का उचित कारण नहीं पाया जाता तो उन्हें 10वीं व 12वीं की परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। इसके अलावा उपस्थिति रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की धांधली उजागर होने पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
वर्जन
विद्यार्थियों की अनुपस्थिति की गणना एक जनवरी 2025 तक की जाएगी। 75 प्रतिशत से कम हाजिरी वाले बच्चों की सूचना सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 7 जनवरी तक बोर्ड में जमा करनी होगी। सीबीएसई ने सुझाव दिया है कि अगर विद्यार्थी नियमित स्कूल नहीं पहुंचता है तो अभिभावकों को इसकी जानकारी दें।
-अनिल यदुवंशी, जिला समन्वयक, सीबीएसई