फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: बीएनएस लागू, मथुरा में पहला मुकदमा चोरी का हुआ दर्ज

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। मथुरा जिले में नए कानून के तहत पहला मुकदमा शहर कोतवाली में चोरी का भारतीय न्याय संहिता की धारा 305 ए, 331 (4) के तहत सोमवार दोपहर दर्ज हुआ है। जिले के 22 थानों में से सिर्फ दो ही थानों में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। दूसरा मुकदमा महावन थाने में दर्ज हुआ। यह मुकदमा भी चोरी के मामले में दर्ज हुआ। वहीं, जिले के सभी थानों में सोमवार को नए कानून व धाराओं की जानकारी लोगों को देने के लिए शिविर आयोजित किए गए।
विज्ञापन

शहर कोतवाली में सूरज कुमार पुत्र सुभाष चंद निवासी सितला पाइसा, भरतपुर गेट द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया। सूरज के अनुसार घीया मंडी में उनकी सूरज ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। रविवार की रात करीब 2.40 बजे अज्ञात चोर दुकान के शटर का कुंडा व ताला तोड़कर अंदर आ गया और लाखों रुपयों के चांदी व सोने के जेवर चोरी कर ले गया। सुबह दुकान खोलने गए तो जानकारी हुई। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करा दी हैं। इंस्पेक्टर रवि त्यागी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपी को ट्रेस कर लिया है। जल्द उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। यह मुकदमा बीएनएस के तहत धारा 305 ए (बंद परिसर के भीतर से चोरी), 331 (4) (सूर्यास्त के पश्चात और सूर्यास्त से पूर्व छिपकर गृह भेदन) में दर्ज हुआ।

महावन में घर से मोबाइल चोरी कर भागते हुए एक पकड़ा, दूसरा फरार
महावन थाने में भी बीएनएस की धाराओं के तहत जिले का दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ।
शिवकुमार पुत्र राजपाल सिंह निवासी खानपुर, महावन ने बताया कि वह रात्रि में घर में सो रहे थे। 12.10 बजे करीब मोबाइल चार्जिंग पर लगा था। तभी खटपट की आवाज सुनाई दी। आंख खुली तो दो लोग भागते हुए दिखे। भतीजे आकाश के साथ उनके पीछे पकड़ने को दौड़ लगाई। मौके पर एक को पकड़ लिया। वहीं, दूसरा फरार हो गया। चोर ने खुद को छुड़ाने के हाथापाई कर आंख पर चोट भी पहुंच दी। मामले में थाना पुलिस को तहरीर दी गई। इंस्पेक्टर रंजना सचान ने बताया कि प्रकरण में मुकदमा बीएनएस के तहत दर्ज किया गया है।
विज्ञापन



नये कानूनों की आधी-अधूरी ट्रेनिंग
केंद्र सरकार द्वारा एक जुलाई को तीन नये कानून लागू हो गए हैं। एक जुलाई से इनके लागू होने पर पहले दिन पुलिस को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, नये कानूनों की आधी-अधूरी ट्रेनिंग पुलिस को हुई है। इसका खामियाजा पहले दिन इस प्रकार भुगतना कि बीएनएस और आईपीसी को एक साथ लेकर मुंशी, दरोगा और इंस्पेक्टर बैठे। इधर, वकीलों को भी कानून की नई और पुरानी किताबों में उलझना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें