वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में मंगलवार को संस्कृति मंत्रालय एवं जीएलए विश्वविद्यालय के सहयोग से तीन दिवसीय भगत-सांगीत नौटंकी महोत्सव का शुभारंभ विधायक पूरन प्रकाश ने किया। प्रथम सत्र में भगत सांगीत नौटंकी का उद्भव और विकास विषयक संगोष्ठी व द्वितीय सत्र में भगत लीला दानवीर मोरध्वज का मंचन किया गया।
विधायक ने कहा कि भगत-सांगीत नौटंकी ब्रज की लुप्त होती विधा है। इस विधा को पुनर्जीवित करने के लिए नई पीढ़ी को इससे जोड़ना चाहिए। जहां तक केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग की बात है। इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। गीता शोध संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश खन्ना ने ब्रज के लोक नाट्य भगत-सांगीत नौटंकी को संरक्षण देने एवं पुष्पित पल्लवित करने के लिए इस तरह के आयोजन किये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. अष्टभुजा मिश्र ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। डॉ. नटवर नागर ने कहा कि ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी से नाटक मंचन के साक्ष्य प्राप्त होते हैं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वांग, भगत, सांगीत, नौटंकी आदि विधाओं के कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। डॉ. निम्मी गुप्ता, पं. दामोदर शर्मा ने विचार व्यक्त किए। द्वितीय सत्र में ब्रज संस्कृति केंद्र मथुरा द्वारा भगत लीला- दानवीर राजा मोरध्वज का मंचन किया गया।
जिसका लेखन एवं निर्देशन आचार्य खेमचंद यदुवंशी एवं सह-निर्देशन अशोक कुमार नीलेश द्वारा किया गया। भगत लीला के अंतर्गत चौधरी रूस्तम सिंह ने रंगाचार्य, लेखराज बैनीवाल ने युवराज ताम्र ध्वज, गयालाल बौद्ध ने अभिनय किया। संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी, आकाशवाणी मथुरा के निदेशक डॉ. देवेंद्र सारस्वत, उप निदेशक डॉ. एस पी सिंह, डॉ. मुकेश वर्मा, नितिन ग्वाल, संजय शर्मा, सुमनकांत पालीवाल, अशोक अज्ञ आदि मौजूद रहे।