-सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की याचिका पर दिया निर्णय
- ब्रिटिशकाल में लगाए बबूल के पेड़ उखाड़े जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली-मथुरा। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सहित अन्य जगहों पर भगवान कृष्ण के पसंदीदा कदम्ब, पीलू, तमाल, बरगद, पाकड़, मोलश्री, खिरानी, अर्जुन व पलास जैसे पौधे लगाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वन विभाग की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि मथुरा से अंग्रेजों के लगाए बबूल के पेड़ हटाकर कृष्णकालीन पौधों को लगाने की अनुमति दी जाए।
जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मथुरा के पुराने गौरव का एहसास कराने के लिए यूपी सरकार की व्यापक योजना को हरी झंडी दे दी। इस योजना के तहत अब वन विभाग उन पौधों को बड़े पैमाने पर लगाएगा, जो वृक्ष भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय थे।
प्राचीन वन क्षेत्र को पुनर्जन्म योजना का नाम दिया
यूपी सरकार ने इन वनों को प्राचीन वन क्षेत्र पुनर्जन्म योजना का नाम दिया है। इसके जरिए वह भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत वाली मथुरा की महिमा को पुनर्जीवित करना चाहती है। सरकार का कहना है कि वह ऐसा कर ब्रज परिक्रमा क्षेत्र में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्राचीन वनों को फिर से वैसा ही बनाना चाहती है। दरअसल मथुरा ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में आता है। इसके तहत पेड़ उखाड़ने संबंधी किसी भी कार्य के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी है।
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साइड स्टोरी....
बबूल के पेड़ उखाड़ने में टीटीजेड के नियम थे बाधक
- वन विभाग ने जून 2023 में दाखिल की थी याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। कान्हा की नगरी में ब्रिटिशकाल में लगाए गए बबूल के पेड़ों को उखाड़ने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की याचिका पर बबूल के पेड़ों को उखाड़कर उनके स्थान पर श्रीकृष्ण के प्रिय वृक्षों के पौधरोपण की अनुमति दे दी है। इसके लिए जिले में 36 स्थान चिह्नित किए गए हैं और करीब 1.6 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
वन विभाग ने यूपी सरकार की व्यापक योजना के तहत मथुरा को हरा भरा बनाकर संवारने का योजना तैयार की थी। इसके तहत अंग्रेजों के समय लगाए गए बबूल के पेड़ों को उखाड़कर उनके स्थान पर भगवान कृष्ण के पसंदीदा कदंब, पीलू, तमाल, बरगद, पाकड़, मौलश्री, अर्जुन, पलास आदि के पौधे लगाना तय किया, लेकिन मथुरा के ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में होने के कारण कुछ नियम बाधा बन गए। इन नियमों के तहत बबूल के पेड़ों को उखाड़ने में अड़चन आई। ऐसे में वन विभाग ने जून 2023 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है।
10 साल की योजना तैयार
डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि वन विभाग ने 10 साल की योजना तैयार की है। कुल 36 स्थान, जिनमें वीरपुर, गोकुल, शेरनगर, सुनरख बांगर, कोटवन, नंदगांव आदि में कदम्ब, पीलू, तमाल, बरगद, पाकड़, मौलश्री, अर्जुन, पलास आदि के पौधे लगाए जाने हैं। पहले तीन साल में बबूल के पेड़ों को उखाड़ने व उनके स्थान पर कान्हा के प्रिय पौधे लगाने का काम होगा। सात साल तक इनको संजोने की योजना है। करीब 1.6 लाख पौधे लगाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बबूल के पेड़ों को चिह्नित करने का काम कराया जा रहा है।