फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: निधिवन में प्रकटे ठा. बांकेबिहारी, झूमे भक्त

विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन(मथुरा)। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के प्राकट्योत्सव पर रविवार को वृंदावन में उमंग, उल्लास की वर्षा हुई। प्राकट्य स्थली निधिवनराज मंदिर में महाभिषेक के साथ सुबह 4 बजे कार्यक्रमों की शुरूआत हुई। इस दौरान माई री सहज जोरी प्रकट भई... आदि मंगल बधाइयों का गायन भी हुआ। बिहार पंचमी पर अल सुबह से ही तीर्थनगरी के कण-कण में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के जयकारे गूंजते रहे। बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी का विशेष पूजन हुआ। हीरा, मोती, पन्नों से जड़े सोने के आभूषणों से प्रभु का शृंगार किया गया। प्रभु की झलक पाने व बधाई देने के लिए श्रद्धालु सुबह से ही निधिवनराज मंदिर व बांके बिहारी मंदिर में उमड़ पड़े।
विज्ञापन


सुबह चार बजे ठाकुर बाकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन में पारंपरिक रूप से सेवायत भीकचंद गोस्वामी, रोहित कृष्ण गोस्वामी के साथ मंदिर के सेवायतों ने मंत्रोच्चारों और स्वामी हरिदास द्वारा रचित केलिमाल के पदों के उच्चारण के मध्य ठाकुरजी की प्राकट्य स्थली पर 1200 किलो दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से महाभिषेक किया। महाआरती उतारी गई। ठाकुरजी की ललिता सखी के अवतार संगीत शिरोमणी स्वामी हरिदास के पदों का गायन कर उनका स्मरण किया।

इसके बाद निधिवन से शुरु हुई शोभायात्रा में मुंबई, दिल्ली, आगरा, सूरत समेत आदि से आए 10 से अधिक बैंड और शहनाई पार्टी शामिल हुई। शोभायात्रा की अगुवाई धर्म निशान लेकर चल रहे संतजन कर रहे थे। इसके बाद बैंडबाजों की शृंखला के पीछे-पीछे चांदी से जड़ित रथ पर स्वामी हरिदास महाराज की छवि विराजमान की गई। जिसे देसी-विदेशी पुष्पों से सजाया गया। रथ के साथ एक दर्जन से अधिक देवी-देवताओं की मनोहरी झांकियों के भक्तों ने दर्शन किए। यात्रा में शामिल महिला श्रद्धालुओं ने डांडिया, पं.बंगाल, दिल्ली, पंजाबी, हरियाणवी एवं राजस्थानी लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए। शोभायात्रा बांकेबिहारी मंदिर पहुंची। यहां स्वामी हरिदासजी की छवि को बांकेबिहारी के गर्भगृह में ले जाया गया। स्वामी हरिदासजी ने ठाकुरजी काे बधाई दी। बांकेबिहारी मंदिर और उसके आसपास का क्षेत्र बांकेबिहारी ने जनम लियौ है और कुंजबिहारी श्रीहरिदास के बोलों से गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा में बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत बच्चू गोस्वामी, गोपी गोस्वामी, शालू गोस्वामी, मयंक गोस्वामी, दासबिहारी अग्रवाल, मुनीश कुमार शर्मा, उमेश सारस्वत आदि उपस्थित थे। वहीं मंदिरों, कुंजों और आश्रमों में बधाई गायन के साथ ही झरा भंडारे हुए। मंदिर एवं नगर के तिराहे-चौराहों पर मोहन भोग (केसरिया हलुआ) का महाप्रसाद गोस्वामियों एवं भक्तों ने ठाकुरजी के प्रादुर्भाव की खुशी में बांटा।
विज्ञापन






1 घंटा 45 मिनट अधिक समय तक खुले मंदिर के पट

वृंदावन। प्राकट्योत्सव बिहार पंचमी पर बांके बिहारी मंदिर के पट अपने निर्धारित समय से 1 घंटा 45 मिनट अधिक समय तक खुले। रविवार सुबह बांकेबिहारी के पट साढ़े सात बजे खुल गए, जबकि मंदिर का निर्धारित समय पौने नो बजे पट खुलने का है। इसी प्रकार स्वामी हरिदासजी की सवारी के कारण दोपहर में आधे घंटे देरी से डेढ़ बजे पट बंद हुए।
बांकेबिहारी के प्राकट्य स्थली निधिवन के बाहर रात दो बजे से श्रद्धालुओं का तांता लग गया। सुबह चार बजे निधिवन के पट खुलते ही निधिवन श्रद्धालुओं से भर गया। यही हाल बाकेबिहारी मंदिर का रहा। यहां सुबह छह बजे से ही श्रद्धालु मंदिर के द्वारों पर पहुंच गए और पट खुलने का इंतजार करने लगे। मंदिर के सह प्रबंधक उमेश सारस्वत ने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी लाल के प्राकट्योत्सव पर देशभर से पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रभु के दर्शन किए और उत्सव का आनंद लिया। संवाद



यह है मान्यता

480 साल पहले संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदासजी ने अपनी संगीत साधना से ठाकुर बांकेबिहारीजी को निधिवन में प्रकट किया। बिहार पंचमी के दिन प्रकटे बांकेबिहारीजी के प्राकट्योत्सव पर आज भी स्वामी हरिदासजी निधिवन से बांकेबिहारी बधाई देने जाते हैं। स्वामी हरिदासजी के छवि के रूप में मंदिर जब पहुंच जाते हैं तभी ठाकुरजी भोग ग्रहण करते हैं।


अर्पित किया 56 भोग, हुआ समाज गायन

बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गोपी गोस्वामी ने प्राकट्योत्सव पर प्रभु को 56 भोग अर्पित किए गए। भक्तों भी यह मनोरम दर्शन सुलभ हुए। अभी तक 56 भोग पर्दे के पीछे अर्पित होते थे। सेवायत ने दिनभर विशेष प्रकार का मेवों से बना हलवा भक्तों को वितरित कराया। मंदिर में हरिदासीय संतों ने समाज गायन पारंपरिक शैली में किया। संतों ने ठाकुरजी के प्राकट्य के अवसर पर बधाई गायन किया।




पुष्पों, गुब्बारों और पीले कपड़े सजाया गया मंदिर

वृंदावन। बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी के प्राकट्योत्सव पर सजावट देखते ही बन रही थी। मंदिर के चौक, जगमोहन, चांदी से जड़ित खंभों और गर्भगृह के द्वार को पुष्पों और गुब्बारों से सजाया गया। मंदिर के सेवायत गोपी गोस्वामी द्वारा दिल्ली से मंगवाए गए पीले रंग के कपड़े से मंदिर के जगमोहन और दीवारों को सजाया गया। मंदिर के बाहर भी झालर गुब्बारे लगाए गए। संवाद



मनमोहन बड़े झूठे...
वृंदावन। संगीत शिरोमणी स्वामी हरिदासजी के लाड़ले के प्राकट्योत्सव के अवसर पर निधिवन राज में ब्रज रसिक गायक जेएसआर मधुकर ने बधाई के भजन गाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने सखी री बांके बिहारी से हमारी लड़ गई अखियां..,सपने में सजन से दो बातें एक याद रही एक भूल गए...,माई री सहज जोरी प्रकट भई...,मनमोहन बड़े झूठे..., मनमोहन मुरली बजा के खुद जाने कहां छुप गया, अपने पिया कि मैं बन गई जोगणिया..., मेरे श्याम ने बंसी बजाई के शुद्ध बुद्ध विसर गई... आदि भजन प्रस्तुत किए। गायक मधुकर का संगीत में साथ भावना सखी, शशि सखी, लक्ष्य, मयंक मधुकर ने दिया। निधिवन के सेवा अधिकारी भीकचंद्र गोस्वामी, रोहित गोस्वामी, कालरात्रि पीठाधीश्वर अखिल दास महाराज, सिद्धार्थ बाबा, किशोरी शरण बाबा, मदन बिहारी बाबा आदि मौजूद रहे। संवाद



41 दिव्यांगों को बांटी गईं ट्राई साइकिल

वृंदावन। बिहारीजी के प्राकट्य उत्सव पर जुगल घाट कुमाऊं की धार्मिक संस्था हरि शरणम जन के सहयोग से बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत ब्रजेश गोस्वामी एवं भागवत प्रवक्ता कृष्णचंद्र ठाकुरजी ने 41 दिव्यांगों को ट्राई साइकिल वितरित की। हरि शरणम जन संस्था के स्वामी रामगोविंद दास ने बताया कि इससे पूर्व में भी हल्द्वानी में 111 निर्धन कन्याओं का विवाह कराया। इस अवसर पर हल्द्वानी से आए अनेक भक्त उपस्थित रहे। संवाद



लड्डू गोपाल संग पहुंचे श्रद्धालु

मैं अपने लाड़ले लड्डू गोपाल को भी आराध्य बांकेबिहारी के जन्मोत्सव का आनंद दिलाने के लिए आई हूं और ठाकुरजी को उनके जन्मोत्सव की बधाई भी दी। मेरे गोपाल ने भी उन्हें बधाई दी है।
- शीतल, शाहजहांपुर


मेरा कान्हा भी सबके लाड़ले बांकेबिहारी का जन्मोत्सव मनाने आया है। जब भी मैं वृंदावन आती हैं मेरा कान्हा भी साथ बांकेबिहारी से मिलने आता है। भक्त के भगवान से मिलने के साथ भगवान से भगवान का मिलन भी होना चाहिए।
विज्ञापन


- गुंजन, दिल्ली
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें