-विश्व बैंक की प्रो पूअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत गौरानगर में बनाया जा रहा आर्टिजन सेंटर
- एमवीडीए द्वारा 24 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा कृष्णा पोशाक
- केंद्र में पोशाक बनाने का प्रशिक्षण और पोशाक को जमा करने के लिए कारीगरों को दिया जाएगा स्थान
मनमोहन पारीक
वृंदावन। वृंदावन में तेजी बढ़ते पोशाक उद्योग को पंख लगाने के लिए विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से प्रो पूअर योजना के तहत गौरानगर में आर्टिजन सेंटर बनाया जा रहा है। करीब 24 करोड़ की लागत से बन रहे इस केंद्र में न सिर्फ पोशाक बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा बल्कि पोशाक रखने और कारोबार करने के लिए कारीगरों को स्थान भी दिया जाएगा।
मथुरा-व़ृदांवन विकास प्राधिकरण द्वारा बनवाए जा रहे तीन मंजिला इस आर्टिजन सेंटर को कृष्णा पोशाक नाम दिया गया है। इसमें छोटे पोशाक कारीगरों के लिए करीब तीन सौ कक्ष तैयार किए जा रहे हैं। बिजली-पानी की भी सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। कक्षों में छोटे पोशाक कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रशिक्षण देने के साथ ही पोशाकों को रखने और बिक्री करने का भी स्थान मुहैया कराएगी। एमवीडीए के जेई राकेश गुप्ता ने बताया कि विश्व बैंक की प्रो पूअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत आर्टिजन सेंटर का निर्माण वृंदावन के गौरानगर में किया जा रहा है। कृष्णा पोशाक के नाम से बन रहा यह सेंटर दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। इसमें ब्रज के ऐसे कारीगरों को स्थान दिया जाएगा, जिनके पास पाशोक उद्योग खोलने के लिए जगह नही है या वे पोशाक उद्योग से जुड़ना चाहते हैं। संवाद
वृंदावन में दो कराड़ प्रति दिन का पोशाक कारोबार
पोशाक कारोबारी गणेश अग्रवाल के अनुसार वृंदावन में करीब 2 हजार पोशाक बनाने के कारखाने हैं। इन कारखानों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से 50 हजार कारीगर जुड़े हंैं। इनमें पोशाक बनाने के साथ ही ठाकुरजी की पगड़ी, पटुका, मुकुट भी शामिल हैं। पोशाक कारोबारी का कहना है कि व़ृदांवन के पोशाक उद्योग का प्रतिदिन दो करोड़ रुपए प्रति दिन का कारोबार है। वृंदावन की पोशाक न सिर्फ देशभर में बल्कि विदेशों में भी जा रही हैं।