वृंदावन में सावन के प्रथम सोमवार को शिवभक्तों ने पार्थिव शिवलिंग अभिषेक पूजन कर महादेव को प्रसन्न किया। प्रियाकांत जू मंदिर में देवकीनंदन महाराज ने भक्तों को शिवमहापुराण का श्रवण कराया। भक्तों ने ब्रज की माटी से 75 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाए। 9 दिवसीय आयोजन में शिवभक्त 21 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करेंगे।
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सोमवार को छटीकरा मार्ग स्थित ठा. श्रीप्रियाकांत जू मंदिर पर नौ दिवसीय शिव महापुराण एवं पार्थिव शिवलिंग अभिषेक महोत्सव का प्रारंभ हुआ। कथा व्यास देवकीनंदन महाराज के सानिध्य में भक्तों ने प्रातः पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन-अर्चन पश्चात उनका सामूहिक अभिषेक किया।
संध्या सत्र में ‘सुखी बसे संसार सब, दुखिया रहे ना कोय....’ विश्व में शांति की प्रार्थना के साथ महाशिव पुराण कथा शुरू हुई। कथा श्रवण कराते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि वृंदावन सीमा की संपूर्ण भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के पदचिन्ह आज भी विराजमान हैं। इसी ब्रजभूमि पर भगवान भोलेनाथ ने अर्द्धनारीश्वर का स्वरूप रखकर कृष्ण भक्ति की है।
ब्रजरज को पवित्र बताते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि इसे स्वयं परमात्मा ने अपने मुख में धारण किया है। ब्रजरज शरीर पर लपेटकर बाबा भोलेनाथ कन्हैया से मिलने आई थे। कहा कि सावन मास में पार्थिव शिवलिंग अभिषेक-पूजन का विशेष महत्व है। ब्रजरज से पार्थिव शिवलिंग निर्माण शिव को प्रसन्न करने वाला अनुष्ठान है। इस मौके पर सुधीर कुमार वर्मा, कामिनी मिश्रा, राधिका, ममता-सतीश गर्ग, संदीप गुप्ता, आचार्य श्यामसुंदर शर्मा, चंद्रप्रकाश शर्मा, इंद्रेशशरण मिश्रा शामिल रहे।