उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में धांधली करने पर प्रधान व सचिव से रिकवरी होगी। शिकायत पर उपायुक्त मनरेगा ने इसकी जांच की। जांच में मामला सही पाया गया। जांच अधिकारी ने आगे की कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है।
जिले के त्रिलोकपुर गांव निवासी गौरव सिंह चौहान ने जिलाधिकारी से शिकायत की। कहा कि ग्राम पंचायत नौनेर में ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर विकास कार्यों में फर्जीवाड़ा किया है। शिकायतकर्ता ने कार्यों की सूची भी शिकायत के साथ संलग्न कर जांच कराने की मांग की। डीएम के आदेश पर मामले की जांच उपायुक्त मनरेगा पीसी राम को सौंपी गई।
वाटर रिचार्ज पिट में मिलीं कमियां
उपायुक्त ने अवर अभियंता आरईएस बीके सिंह के साथ मौके पर जाकर कार्यों का सत्यापन किया। इसमें ग्राम पंचायत के गांव असरगढ़ी, नगला खर्रा, धौरासी, त्रिलोकपुर, हिमायूंपुर, बटरौली, दूल्हापुर हविलिया आदि गांवों में बने वाटर रिचार्ज पिट में कमियां मिलीं। इसके साथ ही अन्य कार्यों में भी छोटी-मोटी कमियां मिलीं।
तकनीकी आंकलन के बाद कुल 30 हजार रुपये की रिकवरी जांच अधिकारी ने प्रस्तावित की है। यह रिकवरी ग्राम प्रधान रतनेश दिवाकर, तत्कालीन पंचायत सचिव और कार्यों की माप करने वाले टीए से होगी। जांच अधिकारी ने कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी है।
जांच से असंतुष्ट शिकायकर्ता
शिकायकर्ता गौरव चौहान ने बताया कि वह जांच से संतुष्ट नहीं हैं। कहा कि प्रशासन ने जांच के नाम पर खानापूरी की है। ग्राम पंचायत में करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि का गबन किया गया है। वह चुप नहीं बैठेंगे। घोटाले को उजागर करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
सरकारी धन के दुरुपयोग का अधिकार नहीं
प्रभारी जिलाधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए थे। जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का अधिकार नहीं है।