फोटो 18 ब्लॉक कार्यालय पर जानकारी देते वरिष्ठ वैज्ञानिक। संवाद
बेवर। अत्यधिक खाद डालने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। इंसान के स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। यह जानकारी खंड विकास कार्यालय पर कृषक भ्रमण प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित बैठक में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शौकत अली ने दी। शुक्रवार को नेशनल मिशन आफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एवं टेक्नोलॉजी प्रसार सुधार (अव्या) योजना के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि रासायनिक खादों के स्थान पर बीजामृत का प्रयोग करें। ग्रीष्मकालीन मूंगफली की फसल में पहले ब्रह्मास्त्र, ज्ञानेस्त्र, निर्मास्त्र का प्रयोग कर अधिक उत्पादन के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को सुधार सकते हैं। मूंगफली की फसल से पहले किसान इसका प्रयोग कर मिट्टी की कठोर परत को तोड़ने का काम करें। उन्होंने बताया कि केंचुआ किसान मित्र है। अत्यधिक रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसान प्राकृतिक संसाधनों में निवेश करें। प्रगतिशील किसान विनोद सिंह चौहान ने भी जैविक खाद का प्रयोग करने की सलाह दी। एडीओ ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एडीओ तेजपाल सिंह, मिथिलेश, उदयवीर, रघुवीर, सरिता कठेरिया, विशुन दयाल, अजिता राजपूत, सविता राजपूत मौजूद रहे।