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जीवा से पूछताछ करने आई उत्तराखंड पुलिस

Mon, 17 Apr 2017 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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जिला जेल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला जेल में बंद पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश जीवा से पूछताछ के लिए सोमवार को उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की पुलिस आई। बता दें कि जीवा पर वहां की विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि वहां कि पुलिस ने यह नहीं बताया कि वह किस केस में पूछताछ करने के लिए आई है।
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 विदित रहे कि मुजफ्फरनगर निवासी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की गिनती पश्चिमी यूपी के बड़े बदमाशों में होती है। पिछले काफी समय से वह यहां पर बंद है। सोमवार को उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की पुलिस यहां पर उससे पूछताछ करने के लिए आई। पूछताछ के लिए आए इंस्पेक्टर ने बताया कि जीवा पर वहां के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन्हीं मामलों में उससे पूछताछ के लिए आए हैं। हालांकि उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि वह किन-किन मामलों में पूछताछ के लिए आए हैं। दो दिन पूर्व भी ब्रह्मदत्त हत्याकांड की सुनवाई के मामले में उसे यहां से दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट में पेश करने के लिए ले जाया गया था। तब भी उसे विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

लैब टेक्नीशियन से गैंग लीडर बना जीवा
मैनपुरी (ब्यूरो)। संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा मूल रूप से मुजफ्फरनगर के गांव आदमपुर का रहने वाला है। वह 12वीं कक्षा तक पढ़ा है। उसने लैब टेक्नीशियन का कोर्स भी किया। मुजफ्फरनगर स्थित एक नर्सिंग होम में 1992/95 तक नौकरी की। जमीन पर कब्जा और लूट डकैती के मामले में 1995 को गिरफ्तार किया गया। मुजफ्फरनगर जेल में उसकी मुलाकात वेस्टर्न यूपी के गैंग लीडर सतेंद्र वरवाला से हुई। 1996 में दोनों जेल से भाग गए। फर्रुखाबाद में नौकरी की तलाश की। इस दौरान सतेंद्र ने जीवा की मुलाकात विजय सिंह से करवाई। 11 फरवरी 1997 को जीवा, सतेंद्र व उसके साथियों ने दो बीजेपी नेताओं की हत्या कर दी। इनमें चर्चित ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या भी शामिल है। एनकाउंटर में साथी रमेश मारा गया। जीवा को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 2000 में जीवा और विजय ने सीबीआई कोर्ट में घटना की स्वीकारोक्ति की। इसके बाद जीवा जमानत पर बाहर निकला। बाहर आने के बाद उसने कथौली और मुजफ्फर नगर में हत्या और अपहरण का काम शुरू कर दिया।
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2002 में गिरफ्तारी के बाद वह लखनऊ जेल में यूपी ईस्ट के मुख्तार अंसारी से मिला। 2005 में बेल पर बाहर आने के बाद जीवा ने साथी मुन्ना बजरंगी, आतोर रहमान, फिरदौस, रिंकू, रामू मल्लाह और विश्वास के साथ मिलकर बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय की हत्या कर दी। कुछ दिनों बाद जीवा गिरफ्तार हो गया। 2008 में विभिन्न जिलों में आठ हत्याओं के मामले में भी जीवा गैंग का हाथ था। वर्तमान में प्रशासनिक आधार पर वह मैनपुरी जिला कारागार में बंद है। बताया जाता है कि वह जेल से ही गैंग आपरेट करता है।
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