पुलिस की कारगुजारी देखिए। नगला दौलत में 1981 में हुए हत्याकांड में नामजद आरोपी को पुलिस ने मृत दर्शा दिया, जबकि वह जिंदा है और गांव में बच्चों के साथ रह रहा है। हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की तो सच सामने आने पर पुलिस अधिकारियोें के होश उड़ गए। ऐसा कैसे हुआ इस मामले में अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला दौलत में 1981 में जयवीर पुत्र सोने लाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उक्त मामले में परिवारीजनों ने गांव निवासी दो भाइयों दाताराम, अमर सिंह समेत एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना के बाद दाताराम ने करीब ढाई वर्ष जिला कारागार में गुजारे। इस दौरान भाई अमर सिंह का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया। मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। मामले के अन्य अभियुक्तों की मौत हो चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक करीब तीन वर्ष पूर्व इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मांगने पर भेजी गई रिपोर्ट में थाना पुलिस ने दाताराम को भी मृत दर्शा दिया। कुछ दिन पूर्व इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर एसपी को आरोपी के बारे में जानकारी करने के आदेश दिए। इस बार मामले की जांच कोतवाली के एसएसआई आरके सिंह को सौंपी गई। जांच हुई तो पूर्व में बरती गई कारगुजारी का खुलासा हुआ। गांव में पता किया तो दाताराम जिंदा मिला।
एएसपी दिगंबर कुशवाह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेजकर अवगत करा दिया गया है कि दाताराम जिंदा है और घर में ही रहता है। उसकी पत्नी भूरी देवी, पुत्र प्रमोद कुमार, प्रेमपाल और विजयपाल उसके साथ ही रह रहे हैं।
वहीं, दाताराम के परिवारीजनों का कहना है कि घटना को काफी समय हो चुका है। शुक्रवार को कुछ पुलिसकर्मी एक कागज लेकर आए और पूछने लगे कि दाताराम जिंदा है या मर गया। पुलिस कर्मियों के पास जो कागज था उस पर दाताराम को मृतक दर्शाया गया था।
दाताराम का भाई था डाकू छविराम गिरोह का सदस्य
मैनपुरी। करीब चार दशक पूर्व जिले व आसपास के जिलों में आतंक का पर्याय माने जाने वाले छविराम गिरोह का सदस्य दाताराम का भाई था। 1981 में छविराम के एनकाउंटर के डेढ़ वर्ष बाद अमर सिंह भी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। अमर सिंह उक्त मामले में दाताराम के साथ सह अभियुक्त था।
किस स्तर पर हुई चूक
मैनपुरी। सुप्रीम कोर्ट को पूर्व में दाताराम की मौत के बारे में जो रिपोर्ट भेजी गई वो किसने भेजी। चूक पुलिस के स्तर पर हुई या गांव वालों द्वारा दी गई जानकारी ही गलत रही। इस मामले में कोई भी अधिकारी कुछ नहीं बोल रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो उक्त मामले में सम्मन तामील कराने वाले ने ही गलती की होगी।