महोबा। कोतवाली क्षेत्र के करहराकलां गांव में साहूकारों का सात-आठ लाख कर्ज न चुका पाने की चिंता में किसान ने फंदा लगाकर जान दे दी। उसे बेटी के हाथ पीले करने की भी चिंता सता रही थी।
सूचना पर पुलिस ने घटनास्थल पहुंच जांच की। परिवार के मुखिया की मौत से परिजनों पर दुखाें का पहाड़ टूट पड़ा है। करहराकलां निवासी रामप्रकाश राजपूत (45) चौदह बीघा भूमि में खेती-किसानी करता था। खेती में लगातार बेहतर पैदावार न होने पर उसने गांव के साहूकारों से कर्ज ले रखा था।
कर्ज अदायगी की चिंता सता रही थी। इस बार उसने 12 बीघा जमीन पर तिल व उड़द की फसल बोई थी। जो अतिवृष्टि से खराब हो गई थी। इससे किसान को सालभर परिवार के भरण-पोषण और साहूकारों से लिए गए कर्ज की चिंता सता रही थी।
मंगलवार की दोपहर जब परिजन अपने-अपने काम से चले गए। तभी उसने कच्चे मकान में लट्ठे से तौलिया का फंदा बनाकर फंदा लगा लिया। कुछ देर बाद जब मां कैलाशबाई घर लौटीं तो बेटे को फंदे पर लटकता देख चीख पड़ीं।
अचेत अवस्था में परिजन उसे फंदे से नीचे उतारकर जिला अस्पताल लाए। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। कोतवाल नरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
दो बीघा जमीन बेचकर भी नहीं चुका पाया सात-आठ लाख का कर्ज
मृतक के बेटे कपिल ने बताया कि लगातार खेती में उचित पैदावार न होने पर पिता ने साहूकारों से सात से आठ लाख रुपये कर्ज ले रखा था। कुछ साल पहले दो बीघा जमीन भी बेच दी थी लेकिन कर्ज की अदायगी पूरी नहीं हो सकी। उसने बताया कि उसकी बड़ी बहन अर्चना की शादी को लेकर भी पिता चिंतित रहते थे। इसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।