महोबा। जिले के आठ गांवों से होकर गुजर रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से यहां के लोगों को खासा फायदा मिलेगा। व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। एक्सप्रेसवे किनारे उद्योग स्थापित होने से यहां का पलायन भी रुक सकेगा।
बुंदेलखंड के सबसे छोटे जनपद महोबा में बेरोजगारी व पलायन की समस्या सबसे बड़ी है। जिले में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे 18 किमी दायरे गुजर रहा है। महोबा को खन्ना क्षेत्र से रैंप बनाकर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है। लोगों को उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे बन जाने से यहां रोजगार का विस्तार होगा। लघु उद्योग व निजी कंपनियां इस ओर अपना रुख करेंगी। जिससे पलायन रोकने में मदद मिल सकेगी। पहले महोबा से दिल्ली जाने में करीब 10 घंटे का समय लगता था। अब एक्सप्रेस वे बनने के बाद महोबा के व्यापारी पांच से छह घंटे में ही दिल्ली पहुंच सकेंगे। जो व्यापारी दिल्ली से माल लाते हैं, उनकी दिल्ली का बाजार करना और सामान लाना अब आसान हो जाएगा।
वीर आल्हा-ऊदल की नगरी महोबा में ऐतिहासिक, धार्मिक व चंदेल कालीन धरोहरों की कोई कमी नहीं है। विश्व पर्यटन स्थल खजुराहो का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले महोबा में भी अब पर्यटक आसानी से आ सकेंगे। यहां के चंदेल कालीन धरोहर, सूर्य मंदिर, आल्हा की गिल्ली, ताला सैय्यद, खखरामठ, कीरत सागर सहज ही लोगों को अपनी ओर लोगों को आकर्षित करते हैं। पहले तमाम सैलानी रास्ता सही न होने के चलते नहीं आ पाते थे। अब बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनने से बड़ी संख्या में पर्यटक महोबा आएंगे। जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
कपड़ा व्यापारी शंकर निषाद कहते हैं कि पहले दिल्ली जाने में 12 घंटे का समय लगता था। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बन जाने से अब छह घंटे में सफर तय कर सकेंगे। जिससे उनके समय की बचत होगी और आसानी से दिल्ली से माल खरीदकर ला सकेंगे। बुंदेलखंड के लिए यह नायाब तोहफा है।
खन्ना निवासी जूता-चप्पल व्यापारी सिकंदर का कहना है कि एक्सप्रेसवे बनने से व्यापारियों को दिल्ली आने-जाने में आसानी होगी। समय के साथ भाड़े की भी बचत होगी। विभिन्न निजी कंपनियों के इस ओर रुख करने से सड़क किनारे की भूमि की कीमत भी बढ़ेगी।