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करोड़ों खर्च फिर भी नहीं मिला मुआवजा

Sat, 22 Aug 2015 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
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लहच्यूरा बांध से आने वाली अर्जुन सहायक बांध परियोजना के अंतर्गत 110 करोड़ रुपये की लागत से 2009 में कबरई बांध का उच्चीकारण का कार्य शुरू किया गया था। जिससे शासन ने मुआवजा लेने वालों की भूमि और आबादी कबरई बांध के डूबे क्षेत्र में आ रही है। किसानों को मनमाफिक जमीन के रेट न मिलने से झिर सहेवा, गंज, धरौन, अलीपुरा सहित कई गांवों के लोगों ने अपनी भूमि देने से मना कर दिया था। जमीनों के सही दाम न मिलने के विरोध स्वरूप 26 जनवरी 2011 को झिर गाव निवासी राममिलन ने बांध के  ऊपर आत्मदाह कर लिया था। जिसके बाद शासन ने सिंचाई विभाग को किसानों की सहमति के बिना बांध का निर्माण न करने का निर्देश दिया था। जिससे बांध का निर्माण रोक दिया गया। शुक्रवार को झिर गांव के किसानों ने भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष जगराम त्रिपाठी के साथ जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह से मिलकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की।  ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को बताया कि गांव के विस्थापन का काम किया जाना है, लेकिन गांव के कूप, मकानों, कृषि भूमि का मुआवजा दर तय न होने से सिंचाई विभाग भुगतान नहीं कर रहा है। जिससे शिक्षा और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। जबकि शासन द्वारा दरें बढ़ाकर तय कर दी गई हैं। ग्रामीणों ने बढ़ी दरों पर कृषि भूमि सहित अन्य संपत्ति का आंकलन कर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि गांव की भूमि का मुआवजा हाल ही में बढ़ाकर स्वीकृत किए गए सर्किल रेट से चार गुना कर दिया गया है। जिस पर ग्रामीण भूमि देने को पूरी तरह सहमत हो गए और भूमि देने के लिए सहमति पत्र जमा कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की । जिलाधिकारी ने तत्काल मौदहा बांध निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता हरिश्चंद्र से बात कर निर्देश दिए कि किसानों के भूमि विक्रय अधिग्रहण संबंधी सहमति पत्र लेकर आयुक्त को भेजा जाए।
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