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Mahoba News: मिट्टी हो रही बीमार, चढ़ रहा पोषक तत्वों की कमी का बुखार

Mon, 10 Jul 2023 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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महोबा। जिले के खेतों की माटी बीमार होती जा रही है। इसका खुलासा मृदा परीक्षण में सामने आया है। कृषि भूमि में जीवांश, कार्बन, नाइट्रोजन व फास्फेट की कमी है। तो वहीं पोटाश की मात्रा अधिक है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान अपने खेत की मृदा का परीक्षण कराकर जरूरत के अनुसार खाद का प्रयोग करें, अन्यथा इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।
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कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जिले के चारों ब्लॉकों से मंगाए गए 2,626 नमूनों की जांच की गई। 12 बिंदुओं पर कृषि भूमि का मृदा परीक्षण किया गया। जिसमें जिले के चरखारी, कबरई, पनवाड़ी व जैतपुर ब्लॉक की कृषि योग्य भूमि में जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन व फास्फेट काफी कम मात्रा में मौजूद है। वहीं कुछ गांव में पोटाश की मात्रा अधिक पाई गई। पोटाश की मात्रा पूरे जिले में अधिक होने के चलते यहां भूमि में पोटेशियम वाले रसायनों का प्रयोग न करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही भूमि की उर्वरकता में सुधार के लिए किसानों को रासायनिक खाद का कम प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भूमि में जीवांश, कार्बन, नाइट्रोजन व फास्फेट की कमी को पूरा करने के लिए गोबर खाद के प्रयोग की सलाह दी जाती है।
किसान नहीं दिखा रहे मृदा परीक्षण में रुचि
महोबा। मृदा परीक्षण के लिए किसान रुचि नहीं ले रहे हैं। सरकारी योजना के तहत जब गांव का चयन किया जाता है तो उन्हीं गांव का मृदा परीक्षण कराया जाता है। एक साल में महज 100 किसान ही स्वयं मृदा परीक्षण के लिए पहुंचे। मृदा परीक्षण के लिए शुल्क निर्धारित है। सूक्ष्म मृदा परीक्षण के लिए 102 रुपये जबकि शुष्क मृदा की जांच के लिए 29 रुपये अदा कर किसान जांच करा सकती है।
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इन गांव में चल रहा मृदा परीक्षण
महोबा। जिले के विकासखंड कबरई के छानीकलां, बरबई, बीला दक्षिण, महेबा, लिलवाही, सुरहा, कौहारी, कहरा आदि गांवों में मृदा परीक्षण कराया जा रहा है। एक गांव से 100 नमूने लेने का लक्ष्य निर्धारित है। मृदा परीक्षण के बाद किसानों को भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए जरूरी सलाह दी जा रही है।

जनपद में मृदा परीक्षण के दौरान पाया गया है कि यहां की भूमि में पोटाश की मात्रा अधिक है। वहीं अन्य कई पोषक तत्वों की कमी भी है। किसानों को रासायनिक खादों का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। गोबर की खाद से पोषक तत्वों की पूर्ति की जा सकती है। किसान इसका प्रयोग करें तो फसलों को फायदा होगा। इससे जमीन में पोषक तत्व बढ़ेंगे। जीवांश, काॅर्बन, नाइट्रोजन व फास्फेट बीज को पौधा बनाने में सहायक होते हैं। इससे तना भी मजबूत होता है।
-जीतेंद्र शुक्ला, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक, कृषि विभाग महोबा।

पोर्टल के माध्यम से मिट्टी के सेहत की होगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जनपद में वर्ष 2019 में मृदा परीक्षण कार्य शुरू कराया गया। इसके बाद से कोरोना काल में मृदा परीक्षण कार्य नहीं हो सका। वहीं पिछले वर्ष 3,852 सैंपल विभाग ने जुटाए थे जबकि चालू वर्ष में केंद्र सरकार ने मिट्टी की सेहत जांचने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के नाम से एक पोर्टल लांच किया है। जिसके माध्यम से मिट्टी की जांच की जानी है। जिसकी शुरुआत तकनीकी कमी के चलते नहीं हो सकी है।
शासन ने योजना के तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक से नौ गांवों का चयन किया है। प्रत्येक गांव से 100 किसानों के सैंपल लिए जाने हैं। जिन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जिसमें किसान को अपना आधार, मोबाइल नंबर, खतौनी आदि कागजात देने होंगे। इस कार्य के लिए विभाग ने 49 कर्मी नियुक्ति किए हैं। जिसमें प्राविधिक सहायक, एटीएम, एटीएस व फील्ड कर्मचारी शामिल होंगे। जो किसान के खेत में जाकर सैंपल लेकर वहीं से पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके तहत सभी ब्लॉकों से 6,300 नमूने लेने का लक्ष्य निर्धारित है।
जनपदीय भमि परीक्षण प्रयोगशाला के अधिकारी अंशू सिंह ने बताया कि गत वर्ष कुल 3,852 सैंपल जुटाए गए थे। जिनकी जांच हो चुकी है, लेकिन अवकाश का दिन होने के कारण जांच रिपोर्ट मिल पाना असंभव है। बताया कि चालू वर्ष में भारत सरकार द्वारा एक पोर्टल लांच किया गया है। जिसके माध्यम से अब मिट्टी की सेहत जांची जाएगी।
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