महोबा। जिला महिला अस्पताल में स्टाफ की कमी का खामियाजा मरीजों व तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। जिले के दूरस्थ इलाकों से 55 किलोमीटर का सफर तय कर आने वाली गर्भवती महिलाओं को सुविधाएं न होने का हवाला देकर या फिर गर्भवती महिलाओं की हालत नाजुक बता कर दूसरे जिलों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
शहरी क्षेत्र के साथ ही जिले के दूर-दराज इलाकों से भी गर्भवती महिलाओं को डिलेवरी के लिए महिला जिला अस्पताल लाया जाता है। मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूरी यूपी व एमपी सीमा पर स्थित महोबकंठ गांव से गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल आती हैं। प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवती महिलाओं की हालत नाजुक बता उन्हें रेफर कर दिया जाता है। परिजन उन्हें यहां से 53 किलोमीटर दूरी पर स्थित मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के अस्पतालों में ले जाते हैं। ऐसे में उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। कई महिलाओं की तो रास्ते में ही डिलेवरी हो जाती है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में महिलाओं की जनसंख्या 4,09,600 है। हालांकि, जनगणना को 12 साल का समय गुजर गया है। ऐसे में महिलाओं की जनसंख्या में इजाफा हुआ होगा। इन महिलाओं के इलाज के लिए सिर्फ एक ही स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे में जिला महिला अस्पताल में महिलाओं के इलाज में बदहाली की बात किसी से छिपी नहीं।
तीन साल पहले संयुक्त जिला अस्पताल से अलग कर नए भवन में जिला महिला अस्पताल शुरू किया गया था। अस्पताल का भवन तो बेहद मजबूत हैं लेकिन यहां मरीजों को मिलने वाली व्यवस्थाएं पूूरी तरह ध्वस्त चल रहीं हैं। हालात यह है कि डॉक्टर तो दूर यहां तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक की शत-प्रतिशत नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं।
डॉक्टरों की तैनाती की स्थिति
पद स्वीकृत तैनाती
सीएमएस-1-1
वरिष्ठ परामर्श दाता-2-0
अधीक्षक एवं प्रभारी भंडार-1-0
पैथालॉजिस्ट-1
ईएमओ-1-1
स्त्री रोग विशेषज्ञ-1-1
एनेस्थेसिस्ट-1-0
चीफ फार्मासिस्ट-1-0
फार्मासिस्ट-1-1
सिस्टर-4-0
उपचारिका-10-0
वरिष्ठ लिपिक-1-0
कनिष्ठ लिपिक-1-1
वार्ड आया-1-1
चौकीदार-1-0
कुक-1-0
स्वीपर-1-0
ओटी अटेंडेंट-1-0
मैने 10 दिन पहले ही यहां कार्यभार ग्रहण किया है। स्टाफ की कमी दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। गंभीर मरीजों को ही बाहर रेफर किया जाता है।
-डॉ. एसपी सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल