उर्स के दूसरे दिन मुंबई से आए कव्वाल अनीस साबरी ने नातिया कलाम के जरिए शमा बांध दिया। कव्वाली सुनने शहर के बाहर से आए लोगों को भी निराश नहीं होना पड़ा। बहार से आए लोग भी रात भर पांडाल में जमे रहे। इस कारण कार्यक्रम स्थल खचाखच भरा रहा।
कव्वाल ने अपनी जन्नत को खुदा के लिए दोजख न बना, अपने मां बाप का तू दिल न दुखा दिल न दुखा, चढ़ गया चिस्ती रंग रंग जैसी तमाम कव्वालियां पेश की। यह सिलसिला सारी रात चलता रहा। सुबह पांच बजे तक चले कव्वाली कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं में खासा जोश दिखाई दिया।
इस दौरान लगातार तालियों की गड़गड़ाहट और वाह वाह की आवाजें पांडाल में गूंजती रहीं। कव्वाली के मिसरे सुनकर श्रोता झूम उठे। बुधवार सुबह पांच बजे कव्वाली कार्यक्रम समाप्त हुआ। इसके बाद आस्ताने पर फातिहा कर सभी लोगों ने मन्नतें मांगी और अपने घरों को रवाना हो गए।