महोबा में आवासीय समस्या को देखते हुए महानगरों की तर्ज पर महोबा-बांदा मार्ग 150 एकड़ की शहरी आवास योजना उप्र आवास एवं विकास परिषद को बनाने के निर्देश जिलाधिकारी विजय विश्वास पंत की पहल पर शासन ने दिए थे। शासन के उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम ने इस योजना का स्थलीय निरीक्षण कर हरी झंडी दी गई थी। योजना का इस्टीमेट आवास विकास ने दो हजार करोड़ रुपये का बनाया था। जिसमें भूमि अर्जन की राशि भी शामिल थी। योजना के तहत सर्वे का काम पूरा कर शासन के शहरी आवास विभाग नगर विकास ने भूमि अर्जन अधिनियम की धारा 28 और 29 की कार्रवाई कर दी थी। शासन की अंतिम स्वीकृति मिलते ही यहां कलेक्ट्रेट में स्थाई निर्माण इकाई उप्र आवास विकास परिषद का डिवीजन भी खोल दिया गया था। इस डिवीजन के पास महोबा शहरी आवास योजना के अलावा 15 करोड़ के तृतीय चरण में बनने वाले कांशीराम आवास, बेलाताल में बनने वाली आईटीआई सहित करोड़ों रुपये की लागत के अन्य कार्य भी थे। लेकिन अचानक आठ जनवरी को देर रात आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने शासनादेश जारी कर महोबा के इस डिवीजन को बंद कर दिया और संबंधित सभी कार्य कानपुर स्थित निर्माण खंड 17 के अधीन कर दिए। अधिशाषी अभियंता सुरेश चंद्र त्रिपाठी को इलाहाबाद स्थानांतरित कर दिया गया। आवास विकास परिषद ने शासनादेश के क्रम में प्रस्तावित 300 सेे अधिक किसानों की भूमि को खरीद फरोख्त करने पर रोक लगा दी थी। जिसकी सूचना शासनादेश के साथ महोबा स्थित सब रजिस्ट्रार को भी दी गई थी। ताकि भूमि अर्जन में कोई व्यवधान न हो। साथ ही प्रस्तावित स्थल पर सभी प्रकार के निर्माण कार्य भी शासन ने रोक दिए थे। उधर कानपुर क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता एसपीएन सिंह ने बताया कि परिषद हित में डिवीजन कानपुर स्थानांतरित किया गया है। महोबा की योजनाओं पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।