महोबा। कीरत सागर तट पर चल रहे नौ दिवसीय ऐतिहासिक कजली मेले की तीसरी शाम बृजगीतों के नाम रही। मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने बृज की होली व मयूर नृत्य की प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने कृष्ण-राधा की वेशभूषा पर सजे कलाकारों पर जमकर फूल बरसाए। जिससे सांस्कृतिक मंच का नजारा वृंदावनमय नजर आया। देर रात तक कार्यक्रम देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में मेला प्रेमियों की भीड़ जुटी रही।
कजली मेले में सांस्कृतिक मंच पर शाम के कार्यक्रमों की शुरुआत नगर पालिका अध्यक्ष संंतोष चौरसिया व ईओ अवधेश कुमार ने दीप प्रज्जवलन के साथ की। इसके बाद सतारी की कंचन ने बुंदेली लोकगायन पेश किया। 12 वर्ष की उम्र में आल्हा गायन करने वाली दो सगी बहनों दीक्षा व प्रतीक्षा ने वीररस से ओतप्रोत आल्हा गायन के माध्यम से आल्हा-ऊदल की वीरता का वर्णन कर बुंदेलों में जोश भरा। गायत्री देवी ने बुंदेली लोक गायन की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया। पं. प्रेम शर्मा एंड पार्टी ने देवा श्रीगणेशा देवा, भाेर भई पनघट की मोहे नटघट श्याम सताए, एक राधा एक मीरा अंतर क्या दोनों की चाह में बोलो, ओ कान्हा बांसुरी वाला, सांसों की माला पे सिमरू में आदि भजन सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद संदीप चंदेल द आर्ट ग्रुप ने राजा हरिश्चंद्र नाटक का मंचन किया। नाटक की प्रस्तुति देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनीति का मंचन देख पूरा ग्राउंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम के अंत में मथुरा ग्रुप के कलाकारों ने राधा-कृष्ण स्वागत गीत, छोटे कलाकार द्वारा पहिये पर राधे-राधे करतब, मयूर नृत्य जिस-जिसने गाया है बांके बिहारी ने उसे अपना बनाया है पेश किया। इसके बाद अधिकारियों व अतिथियों ने कलाकारों के साथ फूलों की होली खेली। इससे माहौल भक्तिमय बन गया। इस मौके पर डीएम मनोज कुमार, एएसपी सत्यम, सीडीओ चित्रसेन सिंह, उपकृषि निदेशक एकेएस यादव, राहुल अग्रवाल, मुशीर, पुष्पेंद्र सिंह, अपर्णा नायक आदि मौजूद रहे।