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Mahoba News: कालीदीन की अनूठी शिल्पकारी से जीवंत रहा गौरापत्थर शिल्प उद्योग

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महोबा। जिले में गौरापत्थर शिल्प उद्योग की बात हो और गौरहारी के कालीदीन व उनके परिवार का नाम न लिया जाए ऐसा तो कभी हुआ ही नहीं हैं। गौरापत्थर शिल्प उद्योग के प्रति कालीदीन का जीवन समर्पित रहा। जिससे गौरहारी के पत्थर और उसके शिल्प की पहचान कायम रही। गौरापत्थर शिल्प उद्योग केे जीआई टैग मिलने की देन कालीदीन की है। कालीदीन की अनूठी शिल्पकारी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। कुछ साल पहले लखनऊ में दौरे पर आए देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी गौरापत्थर शिल्प की तारीफ कर चुके हैं। कालीदीन के पिता मिच्चू मिस्त्री भी यही काम करते थे।आज उनका पुत्र महेश व पूूरा परिवार गौरा पत्थर की शिल्पकारी करता है। कालीदीन की ही देन है कि पहले तो प्रदेश सरकार ने गौरा पत्थर शिल्प उद्योग को एक जनपद एक उत्पाद योजना में शामिल किया। इसके बाद इस उद्योग को जीआई टैग दिलवाया।
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गौरा पत्थर शिल्प उद्योग की बेहतर कारीगरी करने पर कालीदीन को दर्जनों पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। वर्ष 2004, 2005, 2006 व 2007 में हस्तशिल्प राज्य पुरस्कार मिला था। वर्ष 2006 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और वर्ष 2016 में आयुक्त एवं निदेशक उद्योग ने सम्मानित किया था। कालीदीन के पिता मिच्चू मिस्त्री को भी वर्ष 1981 और 1983 में हस्तशिल्प पुरस्कार मिला था। कालीदीन की पत्नी रामप्यारी व पुत्र वीरेंद्र, रविंद्र व महेश को कुछ साल पूर्व मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा भी कालीदीन व उनके परिवार को उनकी अनूठी शिल्पकारी के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
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