महोबा। घर में घुसकर किशोरी से छेड़छाड़ के सात साल पुराने मामले में अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने पर पांच वर्ष के कारावास व 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया।
थाना पनवाड़ी के एक गांव निवासी युवक ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह चार जून 2016 को अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए नारायणदास के ऑटो से पनवाड़ी गया था जबकि उसकी 14 वर्षीय पुत्री घर पर अकेली थी। रास्ते में ऑटो चालक ने पूछा कि कहां जा रहे हो, तो युवक ने नौगांव इलाज कराने जाने की बात बताई। इसके बाद ऑटो चालक पनवाड़ी में दंपती को छोड़कर लौट आया और युवक के घर में घुसकर उसकी पुत्री से छेड़खानी करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया।
शोर-शराबा मचाने पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकला। शाम को लौटने पर पुत्री ने पूरी घटना बताई। थाने में तहरीर देने पर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए जानमाल की धमकी दी। बाद में पुलिस ने आरोपी नारायणदास के खिलाफ छेड़छाड़ समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम) कु. अलका चौधरी ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। मुकदमे की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र कुमार मिश्रा व अमन कुमार सिंह ने बताया कि दोषी नारायणदास को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।