तटबंध पर प्रदर्शन करते नागरिक।
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बारिश का समय नजदीक आते ही लोगों को बाढ़ का खौफ सताने लगा है। प्रशासन के चंदेलकालीन मदन सागर तटबंध की मरम्मत न कराए जाने से नाराज लोगों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। बाद में जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर क्षतिग्रस्त तटबंध को दुरुस्त कराने की मांग की।
सोमवार को मदन सागर सरोवर के तटबंध पर सामाजिक कार्यकर्ता केसी खरे के नेतृत्व में बैठक हुई। यहां केसी खरे ने कहा कि पिछले साल अधिक बारिश होने से पनागरपुरा स्थित मदन सागर तटबंध के टूटने की आशंका बढ़ गई थी। बारिश से पूर्व तटबंध को दुरुस्त न कराया गया तो बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है। यहां लोगों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी अजय कुमार सिंह को ज्ञापन भेजकर तटबंध को दुरुस्त कराने की मांग की गई।
जिलाधिकारी को भेजे ज्ञापन में बताया गया कि पिछले साल अधिक बारिश होने से मदन सागर का तटबंध टूटने की कगार पर पहुंच गया था। तटबंध को प्रतिदिन हजारों लोग देखने जाते थे। तत्कालीन जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह ने कई बार सरोवर का मुआयना किया था।
उन्होंने एनडीआरफ की टीम बुलाई थी। एनडीआरएफ टीम ने तटबंध के किनारे सीमेंट, बालू और गिट्टी की बोरियां लगाकर टूटने से बचाया था। एक साल का समय निकल जाने के बाद भी प्रशासन को तटबंध दुरुस्त कराने की याद नहीं आई है।
मदन सागर से निकली नहर का फाटक बंद है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए इसे खोलने का प्रयास किया गया था। फाटक नहीं खुल सका था। नहर के फाटक को पहले से ही दुरुस्त कराने की भी मांग की गई। इससे तालाब का ओवर फ्लो पानी नहर से निकाले जाने के साथ ही बाढ़ आने पर तबाही को बचाया जा सके। ज्ञापन में तटबंध और नहर दुरुस्त कराने की मांग की गई। ज्ञापन भेजने वालों में लक्ष्मीचंद्र चौरसिया, मुन्नीलाल विश्वकर्मा, जहीर मोहम्मद, रज्जन, निशांत श्रीवास, दिनेश अनुरागी के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।