अमर उजाला ब्यूरो
चरखारी महोबा। हाल ही हुए निकाय चुनाव में छोटा रमना वार्ड से चुने गए सभासद लालता प्रसाद के आत्महत्या करने के बाद से बच्चों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। बचपन में मां के मौत के बाद पिता के सहारे जिंदगी जी रहे तीनों बच्चे अब पिता की मौत के बाद अनाथ हो गए। छोटे बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है।
कांशीराम कालोनी निवासी लालता अहिरवार अपने मां बाप का इकलौता बेटा था। बीए तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद नौकरी न मिलने पर वह अखबार बेचकर बच्चों का पालन पोषण करने लगा।
गरीबी के कारण बड़े बच्चे हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छुड़ा दी। बड़ा बेटा मजदूरी करता था। लाल राशन कार्ड से उसे महीने में 20 किलो गेहूं और 15 चावल मिल जाता था। जिससे बच्चों का पेट तो भर जाता था। लेकिन मजदूरी न मिलने से अन्य खर्च के लिए परेशान रहता था।
पिता के आत्महत्या करने के बाद अब बच्चाें की परवरिश करने वाला कोई नहीं है। पहले मां और पिता की मौत से बच्चे पूरी तरह टूट गए है। हालांकि समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष ने पदाधिकारियाें और सदस्यों से सहयोग लेकर मदद की बात कहीं है। बच्चों को सांत्वना देने वालों का सारा दिन तांता लगा रहा। तीनों भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल रहा।
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शपथ लेने से पहले ही चल बसा सभासद
सपा के सिंबल से निकाय चुनाव मेें जीत हासिल करने बाद सभासद खासा खुश था। इतना ही जीत के बाद घर घर जाकर सभासद ने मतदाताओं का आभार जताया। अब उसे 12 दिसंबर का शपथ ग्रहण समारोह का बेसब्री से इंतजार था। लेकिन अचानक उसने जिंदगी को अलविदा कह दिया इसका किसी को अंदाजा भी नहीं था।
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परिजनों की मदद से लड़ा था चुनाव
चरखारी कस्बे के छोटा रमना से पहली बार चुनाव लड़े और जीत दर्ज करने वाले गरीब प्रत्याशी ने चंदा कर परिजनों की मदद से पांच हजार रुपये में चुनाव लड़ा। मृतक के बड़े बेटे अंकित का कहना है कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए दो हजार रुपये चचेरे भाई ने और चुनाव लड़ने के लिए तीन हजार रुपये मृतक के चाचा ने दिये थे।
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समाजवादी पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीते लालता प्रसाद अहिरवार ने कभी भी अपनी गरीबी परेशानी के बाबत चर्चा नहीं की, अन्यथा उसकी मदद की जाती। मृतक के परिजनों की समाजवादी पार्टी जिला इकाई पूरी तरह से बच्चों की मदद करेगी।
शोभा लाल यादव
जिला अध्यक्ष
समाजवादी पार्टी महोबा