फतेहपुर। पंचायत राज विभाग की ऑडिट में आठ साल पुरानी जांच रिपोर्ट दबाने का मामला उजागर हुआ है। इसमें कई ऐसे काम हुए हैं, जिनका कागजों में कोई लेखाजोखा नहीं है। डीपीआरओ ने ब्लाक से पंचायत स्तर के 19 अधिकारियों के वेतन निकालने पर रोक लगा दी है। विधान सभा की पंचायत राज समिति ने रिपोर्ट तलब की तब स्थानीय अधिकारी हरकत में आए।
मामला वित्तीय वर्ष 2010-11 का है। विकास खंड भिटौरा, असोथर, हसवा, अमौली, देवमई और खजुहा की 22 ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता का मामला प्रकाश में आया है। इन पंचायतों ने जिन कार्यों में सरकारी धन खर्च किया गया था, उसके अभिलेख नहीं मिल रहे। हालांकि उस वक्त ही तत्कालीन ऑडिट अधिकारियों ने आपत्ति की थी। पर, प्रधानों और पंचायत सचिवों ने जांच पूरी करने के लिए कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत ने 25 नवंबर 2016 को भी इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई, मगर कुछ नहीं हुआ। इस कारण आपत्ति का निस्तारण नहीं हो सका। ऐसे ही अन्य प्रकरणों को संज्ञान में लेते हुए विधान सभा की पंचायत राज समिति ने रिपोर्ट तलब की तब स्थानीय अधिकारी हरकत में आए।
जिला पंचायत राज अधिकारी अजय आनंद सरोज ने संदिग्धता के घेरे में आए सभी छह विकास खंडों के सहायक विकास अधिकारियों और 13 ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोके जाने के आदेश दिए हैं। डीपीआरओ ने इन सभी पर दायित्वों का निर्वहन ठीक प्रकार से न करने और ऑडिट परिपालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्राम पंचायत सचिवों के नाम व तैनाती स्थल तलाशे जा रहे हैं।
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इन एडीओ का वेतन रोका गया
पूरे मसले में सहायक विकास अधिकारी भिटौरा लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, एडीओ असोथर रामकृपाल, एडीओ हसवा जागेश्वर प्रजापति, एडीओ अमौली अरविंद पटेल, एडीओ देवमई मान सिंह और एडीओ पंचायत खजुहा अवध बिहारी के वेतन आहरण पर रोक लगाई गई है।
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गड़बड़ी करने वाले ब्लाक और पंचायत एक नजर में
विकास खंड ग्राम पंचायत का नाम
भिटौरा केशवपुर, भलेवा, रहमत, दौलतपुर
असोथर अढ़ावल
हसवा रिठवां
अमौली बेहटा खुर्द, उदूपुर, दरियापुर छेदिया, चांदपुर, मकरंदपुर, मेंहदिया, सरहन बुजुर्ग, धमिना खुर्द, निरखी
देवमई डुंडरा, बिझौली, कृपालपुर बिंदा व कौडिया
खजुहा गढ़ी, लखनाखेड़ा, बेनू, मंडराव