महोबा। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट एवं एडीजे सुरेंद्रनाथ ने एक अनुसूचित जाति की महिला की हत्या करने और पति को बुरी तरह घायल कर दिए जाने के मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 84 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुुगतनी पड़ेगी। अदालत ने दोषियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया हैं।
कोतवाली चरखारी के ग्राम बघरौन निवासी सीमा के घर में 18 मार्च 2012 को तीन बदमाशों ने घर में घुसकर चोरी की थी। तभी सीमा की मां सुमित्रा के जाग जाने पर उसने शोर मचा दिया, जिससे नाराज होकर चोरों ने सुमित्रा पर लाठी-डंडे और धारदार हथियार से लहुलूहान कर दिया था। बीच-बचाव करने आए सुमित्रा अहिरवार के पति जगमोहन को भी घायल कर दिया था, जिससे सुमित्रा अहिरवार की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। मृतका के पति जगमोहन ने घटना की रिपोर्ट कोतवाली चरखारी में अखिलेंद्र यादव, हरीदास, रजौली उर्फ राजबहादुर के खिलाफ दर्ज कराई थी।
शनिवार को न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद अखिलेंद्र यादव, हरीदास, रजोली उर्फ राजबहादुर को दलित की हत्या का दोषी ठहराते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मुकदमे की सरकार पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए एसपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अदालत ने तीनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है। साथ ही 84 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुुगतनी पड़ेगी।
दलित महिला की हत्या के मामले में तीन को आजीवन कारावास
-अदालत ने आरोपियों पर 84 हजार रुपये जुर्माना भी ठोंका