महोबा। सब्जी खरीदने की बात कहकर घर से निकली किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के चार साल पुराने मामले में अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाया। दोषी को सात वर्ष कैद और आठ हजार रुपये जुुर्माने की सजा सुनाई गई।
थाना श्रीनगर के एक गांव निवासी महिला ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 21 सितंबर 2017 की सुबह 10 बजे उसकी 15 वर्षीय पुत्री सूरा चौकी सब्जी लेने जाने की बात कहकर घर से निकली थी। देर शाम तक उसके घर वापस न लौटने पर गांव और रिश्तेदारियों में खोजबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। तब दिल्ली में रह रहे पुत्रों को इसकी जानकारी दी। महोबा में रह रही उसकी एक पुत्री ने बताया कि गांव के ही कुछ लोग किशोरी को बाइक से ले जाते हुए दिखे थे। घटना के पांच दिन बाद पुलिस ने जग्गा उर्फ रामप्रकाश व राकेश पाल समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद पीड़िता बरामद हुई और बयान दर्ज कराए गए।
पीड़िता ने बयान दिए कि अभियुक्तों ने उसके साथ मारपीट कर जबरन गाड़ी में बैठा लिया था। महोबा में एकांत स्थान पर बने कमरे में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया, फिर समोसा खिलाया। इसे खाकर दो दिन तक उसे होश नहीं आया। जब उसे होश आया तो हैदराबाद में एक कमरे में थी।
अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम) संतोष कुुमार यादव ने मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। विशेष लोक अभियोजक पुष्पेंद्र कुमार मिश्रा व अमन कुमार सिंह ने बताया कि दोष सिद्घ होने पर जग्गा उर्फ रामप्रकाश को सजा सुनाई गई है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। राकेश पाल को दोषमुक्त कर दिया गया।