महोबा/चरखारी। बुंदेलखंड के कश्मीर के नाम से प्रसिद्ध झीलों के शहर चरखारी में नगर विकास की कमान इस बार पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है। नगर पालिका बोर्ड में अध्यक्ष, ईओ और आधा दर्जन से अधिक सभासद महिलाएं हैं। ऐसे में चरखारी की गरिमा के अनुरूप विकास कराने की पूरी जिम्मेदारी इन महिलाओं की होगी।
चरखारी एक ऐतिहासिक नगरी है। यहां नगर की नई सरकार का गठन होने जा रहा है। नगर के विकास को लेकर महिलाओं को ज्यादा जिम्मेदारी मिली है। नगर पालिका में ईओ के पद पर दीपालिका यादव तैनात हैं जबकि नगर निकाय चुनाव के दौरान मंजू देवी नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। यहां आधा दर्जन महिलाएं भी चुनाव जीतकर सभासद बनीं है। ऐसे में चरखारी की सुंदरता के साथ ही स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाए रखना जरूरी है। नगर पालिका के जिम्मेदारों की सबसे पहली परीक्षा स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान देनी होगी। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर कवायद शुरू कर दी है। कुछ ही दिनों में केंद्र सरकार की ओर से यहां थर्ड पार्टी सर्वेक्षण कराया जाएगा। ऐसे में चरखारी को स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर परिणाम देने के लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। ताकि चरखारी का नाम स्वच्छता सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हो सके। जन समस्याओं के निस्तारण और नगर विकास से जुड़ी केंद्र व प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर लाने में भी अहम रोल निभाना होगा। पालिका ईओ दीपालिका यादव का कहना है कि अध्यक्ष व सभासदों की शपथ 27 मई को होगी। शपथ ग्रहण में 600-700 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है।
यूपी के पहले मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत जब चरखारी आए थे तो चरखारी का वैभव और सौंदर्य देखकर उनके मुंह से अचानक निकल पड़ा था कि अरे यह तो बुंदेलखंड का कश्मीर है। तभी से चरखारी को बुंदेलखंड का कश्मीर कहा जाता है। एक-दूसरे से आंतरिक रूप से जुड़े विजय, मलखान, वंशी, जय, रतन सागर और कोठी ताल नामक झीलों के कारण यहां की सुंदरता अपने आप में अनूठी है। चरखारी में मोहल्ला सुदामापुरी का गोपाल बिहारी मंदिर, रायनपुर का गुमान बिहारी, मंगलगढ़ के मंदिर, बख्त बिहारी, बांके बिहारी के मंदिर समेत 108 कृष्ण मंदिर स्थित हैं।