संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। जिला अस्पताल में निमोनिया से ग्रसित छह बच्चे आए हैं। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया है। ठंड का मौसम होने से सांस की बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। हालात को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में करीब 100 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे। जिसमें सर्दी, खांसी, बुखार आदि से ग्रसित मरीज शामिल हैं। वहीं निमोनिया से ग्रसित छह बच्चों को 24 घंटे के अंदर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया के हल्के मामले लगभग एक से दो सप्ताह में ठीक हो सकते हैं, जबकि अधिक गंभीर मामलों में पूरी तरह से ठीक होने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।
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निमोनिया के लक्षण
-खांसी, इससे बलगम या कफ पैदा हो सकता है जो हरा, पीला या खूनी होता है।
-बुखार, पसीना और ठंड लगना।
-सांस की तकलीफ या सांस लेने में कठिनाई, विशेष रूप से किसी परिश्रम के काम में।
-सीने में दर्द जो सांस लेने या खांसने से बढ़ जाए।
-थकान और कमजोरी।
-भूख में कमी।
-दिल की धड़कन तेज होना और तेजी से सांस लेना।
निमोनिया से बचाव
-एंटीबायोटिक्स: यदि निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होता है, तो संक्रमण से लड़ने में मदद के लिए एंटीबायोटिक्स निर्धारित की जा सकती हैं। डॉक्टर की सलाह पर निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स लेना महत्वपूर्ण है।
-एंटीवायरल दवा: यदि निमोनिया वायरस के कारण होता है तो संक्रमण के इलाज में मदद के लिए एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह पर निर्धारित की जा सकती है।
-एंटीफंगल दवा: यदि निमोनिया एक फंगल संक्रमण के कारण होता है, तो संक्रमण के इलाज में मदद के लिए एंटीफंगल दवा निर्धारित की जा सकती है।
ये भी जरूरी है
-आराम: अपने बच्चे को जितना हो सके आराम करने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि उसका शरीर संक्रमण से लड़ सके।
-तरल पदार्थ: बच्चे को तरल पदार्थ पीने के लिए प्रोत्साहित करें जो उन्हें हाइड्रेटेड रखने, पतले बलगम के स्राव को बनाए रखने में मदद करता है।
-गर्म सिकाई: छाती और पीठ पर गर्म सिकाई करने से छाती की बेचैनी को शांत करने और सांस लेने में आसानी होती है।
-स्टीम थेरेपी: गर्म पानी से नहाने या गर्म पानी से भाप लेने से बलगम को ढीला करने और खांसी को कम करने में मदद मिलती है।
सीएमएस डॉ. पवन कुमार अग्रवाल का कहना है कि अभी निमोनिया के मरीज नहीं निकल रहे हैं। फिर भी पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं। अभिभावकों से बच्चों को ठंड से बचाने की सलाह दी जा रही है।