महोबा। प्रशासन की अनदेखी के चलते तालाबों की सुंदरता पर ग्रहण लगा है। ऐतिहासिक चंदेलकालीन तालाबों में जलकुंभी व गंदगी का अंबार है। हालात यह है कि तालाब में जहां तक निगाह डालो जलकुंभी ही जलकुंभी दिखाई दे रही है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से जलकुंभी साफ करने के लिए मंगाई गई मशीन जंग खा रही है। जिम्मेदार सफाई को लेकर उदासीन बने हुए हैं।
शहर के मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण सागर में फैली गंदगी व जलकुंभी को साफ कराए जाने को लेकर दो साल पहले मशीन मंगाई गई थी। पालिका ने शहर के तालाबों को केरल मॉडल की तर्ज पर साफ किए जाने का खाका तैयार किया था। शुरूआती दौर में शहर के मदन सागर तालाब में मशीन के माध्यम से जलकुंभी को हटाया गया। बाद में मशीन में तकनीकी खराबी बताकर काम रोक दिया गया। तालाबों को साफ किए जाने की कार्ययोजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से मंगाई गई मशीन जंग खा रही है।
कीरत सागर के तट पर एक माह बाद ऐतिहासिक कजली मेले का आयोजन होगा। जिसमें लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ेगी। कीरत सागर तालाब इस समय गंदगी व जलकुंभी से पटा पड़ा है। तालाब की प्राकृतिक सुंदरता पर ग्रहण लगा है। ऐसे में मेले के समय तालाब के दर्शन के लिए आने वाले लोगों को यहां सिर्फ कीरत सागर की बदहाली देखने को मिलेगी। कीरत सागर तालाब चंदेलशासकों के इतिहास से जुड़ा है।
पालिका ईओ अवधेश कुमार का कहना है कि शहर के चंदेलकालीन तालाबों की सफाई कराई जाएगी। जल्द ही तालाबों में फैली जलकुंभी को मशीन के माध्यम से हटाया जाएगा।