वर्ष 1993 में चरखारी निवासी उदयप्रकाश अहिरवार ने इसी विधानसभा से चुनाव जीता था और बसपा नेता हरगोविंद के साथ मिलकर डॉ. भीमराव अंबेडकर टेक्निकल शिक्षण संस्थान के नाम से एक संस्था बनाई थी। संस्था के प्रबंधक उदय प्रकाश अहिरवार और कोषाध्यक्ष हरगोविंद वर्मा थे। 14 मार्च 1995 को मुख्यमंत्री द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर टेक्निकल शिक्षण संस्थान कुलपहाड़ के नाम पांच लाख रुपये का अनुदान दिया गया। दोनों के हस्ताक्षर से चेक के जरिए पांच लाख रुपये की राशि निकाल ली गई। जबकि इस नाम की कुलपहाड़ में कोई संस्था ही नहीं थी। शिकायत होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी उमेश सिन्हा ने मामले की जांच कराई। जांच के दौरान इस नाम की संस्था न पाए जाने से जिलाधिकारी के आदेश पर नाजिर महादेव ने पूर्व विधायक उदयप्रकाश अहिरवार और वर्तमान बसपा जिलाध्यक्ष हरगोविंद वर्मा के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468 और 408 के तहत 1998 में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने चार्जशीट अदालत में पेश कर दी थी। सिविल जज जूनियर डिवीजन कुलपहाड़ के यहां मुकदमा चलने के कुछ माह बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन (एसीजेएम) की अदालत में केस स्थानांतरित कर दिया गया था। सिविल जज राकेश वर्मा ने दोनों पक्षों के गवाह और बहस सुनने के बाद सोमवार को पूर्व विधायक उदय प्रकाश और बसपा जिलाध्यक्ष हरगोविंद वर्मा को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई। साथ ही 13 हजार का जुर्माना ठाेंका। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। मुकदमे की पैरवी अभियोजन अधिकारी अशोक कुमार त्रिपाठी ने की।