महोबा। सरकार की अमृत 2.0 योजना से जल्द ही शहरियों को पेयजल समस्या से निजात मिलेगी। शहर के आधा दर्जन वार्डों में लंबे समय से बरकरार पेयजल संकट को दूर करने के लिए 100 करोड़ की कार्ययोजना तैयार की गई है। शहर में पांच स्थानों पर बड़ी टंकियां और ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। जमीन चिह्नित कर ली गई है।
बुंदेलखंड की पठारी धरती में पेयजल संकट सबसे बड़ी समस्या है। एक दशक पहले उर्मिल बांध से महोबा पेयजल पुनर्गठन योजना शुरू की गई थी। जिससे शहर की 1.25 लाख की आबादी को पानी मुहैया कराया जा रहा है। शहर के आधा दर्जन से अधिक वार्ड ऊंचाई पर होने के चलते यहां पेयजल संकट बना रहता है। शहर में वर्षों से पेयजल की समस्या को देखते हुए हमीरपुर-महोबा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल की पहल पर महोबा को अमृत 2.0 योजना में शामिल किया गया है। अब उर्मिल बांध से पानी आपूर्ति की निर्भरता कम करते हुए प्रभावित वार्डों में कबरई बांध से पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
100 करोड़ की लागत से तैयार कार्ययोजना में बिलवई मार्ग पर केंद्रीय विद्यालय के पास ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित होगा। भूमि का चयन कर लिया गया है। यहां पानी का शोधन करने के बाद आपूर्ति की जाएगी। हमीरपुर जल निगम शहरी के अधिशासी अभियंता एके शर्मा ने बताया कि 100 करोड़ की लागत का प्रस्ताव डीएम के माध्यम से वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है। राजस्व विभाग से मिलकर जमीन चिह्नित की गई है। शासन से स्वीकृति मिलते ही योजना का काम शुरू हो जाएगा।
प्रभावित वार्डों के साथ विस्तारित आबादी के लिए 1,500 किमी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। हमीरपुर चुंगी, पुलिस अधीक्षक आवास के पीछे, बिलवई मार्ग पर क्रॉसिंग के पास, पठा रोड पर पावर हाउस के सामने और हवेली दरवाजा में पहाड़ पर टंकियों का निर्माण कराया जाएगा।
जिले में पहले चरण में अमृत 2.0 योजना में कबरई, खरेला, कुलपहाड़ और चरखारी को शामिल किया जा चुका है। अब दूसरे चरण में महोबा को भी इस योजना में शामिल किया गया है। जिससे लोगों को पेयजल के लिए दिक्कत नहीं होगी। उर्मिल बांध से आपूर्ति होने के चलते यहां पानी डेड लेवल के करीब पहुंच गया है कबरई बांध वर्तमान में लबालब भरा है। इस बांध से शहर को भरपूर पानी मिल सकेगा।