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Mahoba News: रमजान के पहले अशरे में बरसती है अल्लाह की रहमत

Mon, 27 Mar 2023 12:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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महोबा। मुकद्दस माह रमजान में पहले रोजे से दसवें रोजे तक पहला अशरा होता है। पहले अशरे को रहमतों और अजमतों का अशरा कहते हैं। इस अशरे में अल्लाह तआला की रहमत बरसती है। रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से रहमतों और अजमतों की दुआएं करते हैं।
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इबादतों का महीना रमजानुल मुबारक को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत व तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। रमजान का चांद नजर आते ही शैतान को कैद कर लिया जाता है और जहन्नुम के दरवाजों को बंद कर जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। वैसे तो रमजानुल मुबारक का हर लम्हा अजमतों वाला होता है। इस पाक महीने में एक सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक होता है।
कारी फिरोज बताते हैं कि पहले रोजे से दसवें रोजे तक रमजान का पहला अशरा होता है। इन दस दिनों में अल्लाह की रहमत और बरकतें नाजिल होती हैं। रोजेदार भी रोजे रखकर अल्लाह से बख्शीश की दुआएं करते हैं। इस अशरे में ही अल्लाह गुनाहगारों के गुनाहों को माफ कर कष्ट से निजात देते हैं।
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