कबरई (महोबा)। जिले की एकमात्र सामान्य सीट कबरई में अब चुनाव की रणभेरी बजते ही सामान्य वर्ग के दावेदारों ने मतदाताओं की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है। साथ ही औद्योगिक मंडी में विकास के सब्जबाग लोगों को दिखाने शुरू कर दिए हैं। वर्ष 1977-78 में कबरई नगर पंचायत का गठन होने के बाद पहली बार वर्ष 1988 में यहां चुनाव हुए जिसमें सामान्य सीट होने के कारण अशोक सिंह परिहार नगर के पहले चेयरमैन बने। इसके बाद वर्ष 1995,2000 में हुए चुनाव में यह सीट पिछड़ा जाति के लिए आरक्षित हो गई। 2006 में यह सीट सामान्य हो गई थी जिसे इस चुनाव में बसपा शासन ने पिछड़ा जाति के लिए आरक्षित कर दिया था। इससे सामान्य वर्ग के लोगों की मुस्कराहट गायब हो गई थी। अब सपा सरकार बनने के बाद यह सीट सामान्य होते ही एक वर्ष से गायब रहे सामान्य दावेदार मतदाताओं की नब्ज टटोलने में लगे हुए हैं और अपने दावे के समर्थन में कबरई को अमेठी और सैफई बनाने का सब्जबाग दिखा रहे हैं। इस सीट से पाठकबंधु के भी चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। साथ ही पूर्व चेयरमैन शिवपाल तिवारी, कंधीलाल यादव, शीतल यादव,शंकरलाल सोनी के अलावा अन्य दावेदार भी मैदान में दिखने लगे हैं। सामान्य वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने के बावजूद यहां से पिछड़ी जाति के दावेदारों की संख्या अधिक दिख रही है। सुबह से ही दावेदार घर घर जाकर अपनी हाजिरी लगाना शुरू कर देते हैं। भले ही आम नागरिकों के साथ उनका कभी रचनात्मक जुड़ाव न रहा हो लेकिन अब वे मतदाताओं के घर परिवार के हिमायती बनने का खोखला दावा कर रहे हैं।