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Maharajganj News: सुहाने सफर के लिए करना होगा नए साल तक का इंतजार

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रकम की कमी ने सुस्त कर दी बस स्टेशन निर्माण की रफ्तार, मार्च में हो जाना था पूरा, दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद
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कीचड़ भरे रास्तों से होकर बस पकड़ने को मजबूर हैं क्षेत्र के लोग, स्टेशन नहीं बनने से यात्रियों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सुहाने सफर के लिए क्षेत्र के लोगों को नए साल तक का इंतजार करना पड़ेगा। लोगों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे बस स्टेशन के दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि इसके मार्च तक पूरा हो जाना था। विभाग की इस लापरवाही की वजह से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बारिश होने पर परिसर कीचड़ से भर जाता है। बस का इंतजार करने के दौरान यात्रियों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं।
शहर में बस स्टेशन निर्माण की गति बेहद सुस्त है। 6 करोड़ 82 लाख रुपये की लागत से स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है, इसमें अब तक महज तीन करोड़ 10 लाख ही मिल सका है। शेष रकम आने का इंतजार किया जा रहा है। इस वजह से अभी तकरीबन एक तिहाई काम ही पूरा हो सका है। अभी ज्यादातर कार्य अधूरा है। नवंबर 2021 से बस स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ है। करीब 18 माह का वक्त गुजर गया, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हो सका है। भवन बनकर तैयार है, अंदर जरूरी कामकाज नहीं हुए है। बाहर से सफेदी भी नहीं हुई है। परिसर में मिट्टी गिराकर छोड़ दी गई है। बिजली से संबंधित काम अधूरे हैं। सामने की चहारदीवारी बन चुकी है। निर्माण के लिए तीसरे किस्त की रकम का इंतजार हो रहा है।
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इससे यात्रियों को सड़क या निर्माणाधीन भवन के बाहर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है। कार्यदायी संस्था आवास विकास को नामित किया गया है। बस स्टेशन निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में 1 करोड़ 10 लाख रुपये, दूरी किस्त के रूप में एक करोड़ 10 लाख रुपये की राशि मिली थी। जबकि तीसरी किस्त अभी तक कार्यदायी संस्था को नहीं मिली है। जिससे निर्माण पूरा होने में देरी हो रही है।

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रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण छह करोड़ 82 लाख रुपये में किया जाना है। ज्यादातर काम हो चुका है। भवन पूरा बन चुका है। अंदर कुछ काम नहीं हुआ है। चहारदीवारी भी बना दी गई है। अभी पूरी रकम नहीं मिली है। रकम मिलते ही निर्माण कार्य में तेजी जाएगी। दिसंबर तक काम समाप्त हो जाएगा।
रामअभिलाश, अवर अभियंता, परिवहन निगम
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दो मंजिला बना है बस स्टेशन

-दो मंजिला बने भवन में यात्रियों को एक ही छत के नीचे अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया होंगी। यात्रियों को अत्याधुनिक कैंटीन, वेटिंग एरिया और शौचालय, पार्किंग एरिया की सुविधा मिलेगी, वहीं एआरएम कक्ष, पूछताछ केंद्र, अधिकारी, कर्मचारी कार्यालय बन चुका।

नवंबर 2021 में निर्माण शुरू हुआ था
शहर में काॅलेज रोड पर पुराना बस स्टेशन वर्ष 1962 में बना था। यह जर्जर हो गया तो इसे तोड़कर नया बनाने की कवायद शुरू हुई। काफी जद्दोजहद के बाद नए भवन की स्वीकृति मिली। 3.72 करोड़ रुपये से बनने वाले इस भवन के लिए कार्यदायी संस्था आवास-विकास को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें 82 लाख रुपये अवमुक्त होने के बाद नवंबर 2021 में बस स्टेशन के नए भवन के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था। लेकिन धन के अभाव में निर्माण कार्य को गति नहीं मिल पा रही है। बस स्टेशन पर यात्रियों की कौन कहे, कर्मचारियों को भी बैठने की बेहतर जगह नहीं है।
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स्टेशन बनने में देरी की जा रही है। अगर यह समय से बना गया होता तो कीचड से होकर बसों में नहीं बैठना पड़ता।
देवेश पटेल, शास्त्री नगर
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दावे और हकीकत में बहुत अंतर नजर आ रहा है। दो साल से स्टेशन बन रहा है, लेकिन अब तक बनकर तैयार न हो, यह दर्शा रहा है कि अधिकारी उदासीन हैं।
सूरज वर्मा, आजाद नगर

बीते साल भी बारिश में दुदर्शा झेलनी पड़ी, इस वर्ष भी जब जब बारिश हुई तो बस में बैठने के दौरान समस्या हुई। अधिकारियों की गंभीरता नहीं दिख रही है।
अविनाश यादव, सिविल लाइन
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समस्याओं के समाधान के प्रति कोई गंभीर नहीं दिखता है। बजट नहीं मिलेगा तो निर्माण कार्य में तेजी कैसे आ सकती है। विकास का दावा करने वालों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
प्रशांत चौरसिया, शास्त्री नगर


सितंबर में सीएमओ कार्यालय को मिलेगा अपना भवन
महराजगंज। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को सितंबर माह में अपना भवन मिल जाएगा। सदर सीएचसी में पर्याप्त जगह होने के बाद यह पूरी गति से संचालित हो सकेगा। करीब 33 साल बाद सीएमओ कार्यालय का अपना भवन होगा। इसको भी मार्च में पूरा हो जाना था।
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जानकारी के अनुसार, एसपी कार्यालय के पीछे सीएमओ कार्यालय निर्माणाधीन है। लगभग ज्यादातर काम पूरा हो चुका है। बाहर से रंगाई पुताई भी हो चुकी है। अंदर कुछ जरूरी काम शेष रह गए हैं। मार्च में ही इसे हैंडओवर किया जाना था, लेकिन सुस्त गति से काम होने के कारण हैंडओवर नहीं हो सका। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय निर्माण की लागत 298.19 लाख रुपये है। वर्ष 1989 में महराजगंज को गोरखपुर जिले से अलग किया गया था। उस समय जिले में सीएमओ कार्यालय नहीं था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सदर में सीएमओ कार्यालय संचालित होने लगा।
- सितंबर तक कार्यालय अपने नए भवन में शिफ्ट होगा। भवन के अंदर कुछ काम शेष रहे गए हैं, उसे पूरा होने के बाद हैंडओवर लिया जाएगा।

डॉ. नीना वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
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