निचलौल। नेपाल में पहाड़ों पर बारिश बंद होने के बाद से जिले से होकर बहने वाली नदियों का जलस्तर घटने लगा है। बृहस्पतिवार दोपहर में जहां गंडक नदी का जलस्तर 88 हजार 300 क्यूसेक पर आ गया है। वहीं चंदन नदी का जलस्तर इतना कम हो चुकी है कि पानी लेबल के नीच पहुंच गया है। इससे नदियों के किनारे बसे लोगों और विभाग के जिम्मेदारों ने राहत की सांस ली।
बाल्मिकी नगर बैराज से बृहस्पतिवार को गंडक नदी में छोड़ गए जलस्तर 88 हजार 300 क्यूसेक दर्ज किया गया है। जबकि बुधवार को गंडक का जलस्तर करीब डेढ़ लाख क्यूसेक के करीब पहुंच गया था। गंडक नदी में करीब पांच लाख क्यूसेक जलस्तर होने पर वह खतरे के निशान के करीब पहुंचती है। वहीं इस नदी पर सिंचाई विभाग की ओर से नदी के किनारे बने वाच टॉवर से संदिग्ध ठोकरों और जलस्तर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वहीं नेपाल के पहाड़ों पर हल्की बारिश में भी भारतीय क्षेत्र में तबाही मचाने वाली चंदन नदी का जलस्तर इतना नीचे चला गया है की वह लेबल में नील दिखा रहा है। जबकि प्यास नदी में 100.5 लेबल जलस्तर है।
किसानों की फसलों और जंगलों को काटने वाली रोहिनी नदी के भी जलस्तर में काफी गिरावट आई है। रोहिनी नदी में 77.1 लेबल जलस्तर है। ऐसे में इन नदियों के किनारे बसने वाले लोगों के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। वहीं सिंचाई खंड दो के अवर अभियंता सुग्रीव मल्ल ने कहा की नेपाल में पहाड़ों पर बारिश से गंडक नदी के साथ ही अन्य नदियों के जलस्तर में थोड़ी बढ़ोत्तरी देखने को मिली थी, लेकिन जैसे ही पहाड़ों पर बारिश थमी तो नदियों का जलस्तर भी तेजी से कम होने लगा है। गंडक नदी के ठोकरों और जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही है। इससे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि नदी के तटबंध पर काफी बेहतर तरीके से मरम्मत कार्य कराए गए हैं।