निचलौल। क्षेत्र के नारायणी नदी और घने जंगलों से घिरे सोहगीबरवा सहित तीन गांव और करीब आठ टोले बीते दिनों बाढ़ के पानी से प्रभावित हो गए थे। ऐसे में अब उन्हें प्रशासन की ओर से राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते बाढ़ राहत सामग्री पाने के लिए पीड़ितों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बाढ़ पीड़ितों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया की बीते दिनों पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश से नारायणी नदी उफना गई थी। ऐसे में नारायणी नदी से सटे सोहगीबरवा, भोतहा और शिकारपुर के करीब आठ टोले बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए। ऐसे में लोगों को करीब 24 तक मचान और छतों पर गुजारनी पड़ी थी। इतना ही नहीं बाढ़ का पानी घरों में घुसने से खाने पीने की सामान भी खराब हो गया था।
प्रशासन की ओर से उन्हें राहत सामग्री तो मुहैया कराई जा रही है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते राहत सामग्री पाने के लिए उन्हें करीब छह किलोमीटर का लंबा सफर तय कर बिहार राज्य के नेबुआ नौरंगिया पहुंचना पड़ रहा है। इन लोगों ने राहत सामग्री वितरण करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के साथ ही गांव तक सामग्री पहुंचाने की मांग की।
एसडीएम शैलेंद्र गौतम ने कहा की रोहुआ नाला में ज्यादा पानी होने की वजह से बाढ़ राहत सामग्री गांव तक नहीं पहुंच पा रही थी। अब पानी कम हो चुका है। ऐसे में राहत सामग्री गांव तक पहुंचाकर वितरण किया जाएगा।