महराजगंज। शहर से लेकर सरहद तक निर्माणाधीन परियोजनाएं चार माह में पूरी हो जाएंगी। बायो गैस प्लांट का निर्माण कार्य मार्च से शुरू होगा, जो एक वर्ष में तैयार हो जाएगा। बॉर्डर एरिया में सड़क बन रही है। वहीं शहर में पेयजल व्यवस्था सुधार के लिए दो ओवरहेड टैंक बनेंगे। इससे लोगों की पानी की समस्या दूर हो जाएगी। सड़क बेहतर होने से सीमा सुरक्षा में भी आसानी होगी।
जानकारी के अनुसार, शहर में दो ओवरहेड टैंक बनेंगे। इससे करीब पांच हजार की आबादी को फायदा होगा। चौपरिया व धनेवा धनेई में स्थान चिह्नित हो चुका है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि करीब 25 प्रतिशत धनराशि मिल चुकी है। दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। शहर में बुनियादी सुविधाओं की बेहतरी के लिए कार्य किए जा रहे हैं।
दूसरी ओर भारत नेपाल सीमा पर 84 किमी इंडो नेपाल सड़क लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाई जा रही है। मार्च के अंतिम सप्ताह में पूरी हो जाएगी। सड़क बनने से आसपास गांवों और लोगों को आने-जाने में भी सहूलियत मिलेगी। दूसरी तरफ एसएसबी जवानों को गश्त करने में आसानी होगी। यह सड़क कोल्हुई थाना क्षेत्र के खैराघाट, जोगियाबारी होते हुए संपतिहा राष्ट्रीय राजमार्ग में मिल गई है, फिर नौतनवा गैस गोदाम के पास से आराजी सरकार उर्फ बैरिहवा गांव होते हुए हरदीडाली, कैथवलिया उर्फ बरगदही, खनुआ, शेख फरेंदा होते हुए इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट से छूते हुए सोनौली के पास, श्यामकाट, भगवानपुर, परसा मलिक के सेवतरी, रेहरा, बरगदवा बाजार, ठूठीबारी, झूलनीपुर, शीतलापुर, चकरार आदि स्थानों से होते हुए कुशीनगर तक जाएगी।
कृषि अपशिष्टों से बनेगी बायोगैस, किसानों को होगा लाभ
महराजगंज। नौतनवा तहसील क्षेत्र के गांव महुअवा में पांच एकड़ भूमि में सीबीजी (कंप्रेस्ड बायो गैस) प्लांट लगने की तैयारी चल रही है। प्लांट निर्माण का कार्य मार्च से शुरू होगा, जो एक वर्ष में तैयार हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक, हनुमंत बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से महुअवा गांव में बायो गैस प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। इस प्लांट के लगने से क्षेत्र के किसानों के कृषि अपशिष्टों का उपयोग किया जाएगा और किसान अपने कृषि अपशिष्ट प्लांट पर बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। गैस उत्पादन के दौरान निकला कचरा जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाएगा। स्थापित हो रहे गैस प्लांट की कार्ययोजना के मुताबिक रोजाना 70 टन कृषि अपशिष्ट से करीब तीन टन गैस उत्पादन करने वाली मशीनों को स्थापित किया जाएगा। गैस उत्पादन के बाद निकला कचरा जैविक खाद होता है, जो किसानों को पांच रुपये प्रति किग्रा की दर से मिलेगा। प्लांट से रोजाना करीब 60 टन जैविक खाद का उत्पादन होगा। कंप्रेस्ड बायो गैस के उत्पादन के लिए जलकुंभी, पराली, भूसा, घास, गोबर, मक्के व गोभी के काटे गए पौधे आदि कृषि अपशिष्टों का प्रयोग किया जाएगा।
बेरोजगारी होगी दूर, बढ़ेगा आय का स्रोत
प्लांट से सीमावर्ती गांव बरगदवा उर्फ गनवरिया, सुकरौली उर्फ अरघा, हरदी डाली, खनुआ, शेख फरेंदा, महुअवा, नौतनवा, कुंसेरवा, पुरैनिहा, लोहसी, बरवाभोज, केवटलिया, पोखर भिंडा उर्फ बनरहवा आदि आसपास के गांवों के कुछ लोगों की बेरोजगारी दूर होने के साथ अपशिष्ट से आय का स्रोत बनेगा। हनुमंत बायो एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमरनाथ पांडेय ने बताया कि महुअवा में गैस प्लांट के संचालन के बाद गैस उत्पादन के विस्तार के लिए बढ़ी मशीनें व जिले के अन्य ब्लाकों में भी गैस प्लांट लगाने की तैयारी है।