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Maharajganj News: कारगिल युद्ध में नौतनवा के दो जांबाजों ने भी दी थी शहादत

Fri, 26 Jul 2024 04:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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नौतनवा। कारगिल युद्ध में शहीद हुए नौतनवा कस्बे के दो वीर सपूतों की कुर्बानी आज भी क्षेत्र के लोगों के लिए मिसाल है। उनकी शहादत पर हर कोई गर्व महसूस करता है।
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नौतनवा कस्बे के छपवा तिराहे पर शहीद पूरन बहादुर थापा व महेंद्र नगर वार्ड में शहीद प्रदीप कुमार थापा की प्रतिमा को देखते ही लोगों की आंखें आज भी नम हो जाती हैं। हिमालय के तराई में बसे नौतनवा के लाल को शहीद हुए 25 साल बीतने के बाद भी नौतनवा में समय-समय पर दोनों वीर सपूतों के हिम्मत और उनके जज्बे को याद कर लोग अपने आप में गर्व महसूस करते हैं। देश के लिए अपनी कुर्बानी देने वाले दोनों वीर सपूतों के परिवार के लोग आज भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं।

नौतनवा थाना क्षेत्र के गांव आराजी सरकार उर्फ बैरिहवा निवासी स्वर्गीय करन बहादुर थापा एक किसान थे। उनकी पत्नी स्वर्गीय सुमित्रा देवी ने तीन बेटों को जन्म दिया। बड़ा बेटा शहीद पूरन बहादुर थापा, दूसरा बेटा श्याम थापा तथा सबसे छोटा अशोक थापा हैं। 26 अप्रैल 1997 को पूरन बहादुर थापा गोरखा रेजीमेंट में राइफल मैन पद पर भर्ती हुए थे।
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28 मई 1999 को करगिल युद्ध में दुश्मनों का छक्का छुड़ाते हुए शहीद हो गए। परिवार में देश प्रेम की भावना थी। बड़े भाई के शहीद होने के बाद उनके छोटे भाई श्याम थापा ने प्रण लिया की भले ही बड़े भाई देश की सेवा में शहीद हुए वह भी सेना में भर्ती होने का मन बनाए और आर्मी में भर्ती हुए। वर्तमान में श्याम थापा लांस नायक पद पर बीकानेर में तैनात हैं। सबसे छोटे भाई अशोक बहादुर थापा घर पर परिवार के साथ रहते हैं।

नौतनवा कस्बा के महेंद्र नगर वार्ड निवासी शहीद प्रदीप कुमार थापा देश की सेवा करने के लिए 27 दिसंबर 1977 में गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हुए। 9 नवंबर 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हो गए। उनके बेटे अमर बहादुर थापा तथा केहर बहादुर थापा भी आर्मी में हैं।

गोरखा समाज को जांबाजों की शहादत पर नाज है
भूतपूर्व सैनिक मनोज कुमार राना का कहना है कि देश सेवा करते हुए समाज के दो लाल शहीद हुए। इसका गर्व है। गोरखा समाज के लोग प्रति वर्ष कारगिल विजय दिवस के मौके पर नौतनवा कस्बा में शहीद प्रदीप कुमार थापा व पूरन बहादुर थापा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देकर उन्हें नमन करता है। भूतपूर्व सैनिक नर बहादुर राना ने बताया कि आज भी गोरखा समाज के युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा में लगे हुए हैं। देश सेवा करते शहीद हुए नौतनवा के दो बीर सपूतों की कुर्बानी से गोरखा समाज को नाज है। उनकी याद में प्रति वर्ष कार्यक्रम कर श्रद्धांजलि दी जाती है।
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