महराजगंज। जिला अस्पताल में ट्राॅमा सेंटर का संचालन हो रहा है, लेकिन यहां सुविधा इमरजेंसी वाली ही मिल रही है। ट्राॅमा सेंटर के मानक के अनुसार यहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। न तो पूरे संसाधन हैं और न ही पर्याप्त स्टाफ हैं। गंभीर घायलों को आज भी गोरखपुर रेफर करना पड़ता है।
जिले की करीब 30 लाख की आबादी को सुविधा देने के लिए करीब दो साल पहले ट्राॅमा सेंटर बनाया गया था, लेकिन यहां जरूरी संसाधन नहीं हैं। इसके लिए कोई कारगर प्रयास नहीं दिख रहा है। हर माह करीब 100 से अधिक केस गोरखपुर मेडिकल काॅलेज रेफर किया जाता है। शहर के विस्मिल नगर के रामप्रीत कहते हैं कि ट्राॅमा सेंटर में पूरी सुविधा रहती तो समस्या नहीं होती। यहां तो बस नाम का ट्राॅमा सेंटर संचालित हो रहा है। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ट्राॅमा सेंटर में विशेषज्ञों की तैनाती नहीं
ट्राॅमा सेंटर में सर्जन, एनस्थेटिक, आर्थोपेडिक, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ आदि डाक्टरों की तैनाती होनी चहिए। विशेषज्ञ भी नहीं हैं। ताकि दो शिफ्टों में ट्रामा सेंटर चलाया जा सके। स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाॅय, फार्मासिस्ट आदि हैं। इसके अलावा ट्रामा सेंटर आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण से सुसज्जित होते हैं। इसमें वेंटिलेटर, कलर एक्सरे, डिजिटल अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और आईसीयू की भी व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि मरीजों को पूरी इलाज की व्यवस्था यहीं पर मिल जाए, उन्हें रेफर करने की जरूरत न पड़े।
क्या है ट्राॅमा सेंटर
ट्राॅमा सेंटर ऐसा वार्ड होता है, जहां घायल मरीजों को व्यापक आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जाती हैं। बस, ट्रक, कार, जीप, मोटर साइकिल आदि वाहन दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिससे लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। शरीर में और भी कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं। इन घायलों के लिए ट्राॅमा सेंटर बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराता है।
वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों में बेहतर कार्य करने का प्रयास जारी है। सुविधाओं के विस्तार के लिए पत्राचार किया गया है। आने वाले दिनों में व्यवस्था बेहतर हो जाएगी।
-डॉ. एपी भार्गव, सीएमएस