ट्रकों को सीमा पार जाने के लिए नहीं करना पड़ेगा दो-दो दिन तक इंतजार
सुरक्षा मजबूत होगी, पयर्टकों को सुविधा मिलेगी, सोनौली में नहीं लगेगा जाम
केवटलिया में 450 करोड़ रुपये से 120 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा चेकपोस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सोनौली में इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बनने से भारत-नेपाल के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सोनौली में जाम नहीं लगेगा। पर्यटकों को काफी सुविधा होगी। सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी। आव्रजन कार्यालय के पास भीड़ नहीं लगेगी।
बता दें कि चेकपोस्ट का निर्माण भारत-नेपाल सीमा स्थित सोनौली कस्बे के पास केवटलिया में 450 करोड़ रुपये की लागत से 120 एकड़ भूमि पर शुरू हो चुका है। चहारदीवारी बनकर तैयार है। परिसर के भीतर सड़क बनाई जा रही है। वर्ष 2024 के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है।
नेपाल सीमा से लगे सोनौली कस्बे में सड़क के किनारे ट्रकों की लंबी कतार दिख जाती है। जांच की प्रक्रिया पूरी करने में वक्त लगने की वजह से ट्रक चालकों को सड़क के किनारे वाहन खड़ा करके लंबा इंतजार करना पड़ता है। चेकपोस्ट बन जाने से यह झंझट खत्म हो जाएगी।
शुक्रवार को सोनौली कस्बे से पहले सड़क के किनारे ट्रक चालक सुरेंद्र सिंह मिले। वह पंजाब से सामान लेकर नेपाल जा रहे थे। उन्होंने बताया कि जांच चौकी बन जाने के बाद समस्या नहीं होगी। बड़े परिसर में ट्रक एक जगह खड़े हो जाएंगे। सभी काम आसानी से हो जाएंगे।
कुछ दूर आगे बढ़ने पर आजमगढ़ के रामकुमार तिवारी ट्रक लेकर जाते दिखे। रुकने का इशारा करने पर बोले- रुक गए। चेकपोस्ट की बात पूछने पर हंसते हुए बोले -आगे जांच करानी है, देर हो जाएगी। गाड़ी में बैठो बात करते हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी सड़क के किनारे दो-दो दिन गुजारना पड़ता है। चेकपोस्ट के बारे में बहुत सुना है। इससे पता चल रहा है कि आने वाले दिनों में दुश्वारियां दूर हो जाएंगी।
दोपहर बाद करीब 1:30 बजे केवटलिया पहुंचने पर निर्माणाधीन इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट दिखा। चहारदीवारी का काम लगभग पूरा हो चुका है। डांडा बैराज की तरफ चहारदीवारी का प्लास्टर और रंगाई का काम हो रहा है। केवटलिया गांव की तरफ जाने वाली सड़क पुरानी है। करीब 30 फीट तक पिलर लगे हैं। यहां गेट लगाया जाएगा। बृहस्पतिवार को हुए शिलान्यास के दौरान जो टेंट का सामान आया था, उसे ट्रक पर लादा जा रहा था।
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... इंट्रीगेटेड चेकपोस्ट की खासियत
एक ही परिसर में अलग-अलग 21 पाइपलाइन बनाई जाएंगी। टर्मिनल बिल्डिंग, भारत व नेपाल का इंटीग्रेटेड कार्गो टर्मिनल, क्वारंटीन बिल्डिंग, वेयर हाउस, आयात-निर्यात, कार्गो पार्किंग, स्टाफ बैरक, रेस्ट रूम, फायर स्टेशन व कार्गो यार्ड आदि बनाया जाएगा। भारत-नेपाल के सोनौली सीमा के पास बन रहा इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बौद्ध सर्किट का महत्वपूर्ण निकास बिंदु है। यह गौतम बुद्ध की जन्मस्थली और बौद्ध पर्यटन केंद्र नेपाल के लुम्बिनी के बेहद करीब है। सीमा से सटे नेपाल के भैरहवा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी है।
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रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा
भारत-नेपाल के सोनौली सीमा पर गृह मंत्रालय की ओर से एयरपोर्ट की तर्ज पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का निर्माण कराया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण के बाद लैंडपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने चहारदीवारी का निर्माण पूरा कर लिया है। लैंडपोर्ट में एक ही परिसार में सभी जांच एजेंसियां, वाहन पार्किंग, हॉस्पिटल आदि की सुविधाएं मिलेंगी। भविष्य में इसे रेलवे नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा।
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एक ही छत के नीचे होंगी सभी जांचें
देश -विदेश से आने वाले यात्रियों और पर्यटकों को सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इसी मापदंड पर लैंडपोर्ट विकसित किया जा रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद कस्टम, एसएसबी, पुलिस, इमिग्रेशन सहित तमाम खुफिया एजेंसियों के कार्यालय एक ही परिसर में रहेंगे। इससे जांच में सहूलियत होगी।
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वर्ष 2004 में आईसीपी को मिली थी मंजूरी
भारत सरकार ने वर्ष 2004 में भारत-नेपाल के सोनौली सीमा पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के निर्माण मंजूरी दी थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर पेच फंसा था। कई बार ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच वार्ता हुई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने निर्णय लेते हुए दूसरे स्थान पर आईसीपी बनवाने के लिए जमीन अधिग्रहण का निर्णय लिया। इसके बाद 51 हेक्टेयर जमीन करीब पौने दो सौ करोड़ रुपये में खरीदी गई। डीपीआर करीब 300 करोड़ रुपये का है। लैंडपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन भी इसका दौरा कर चुके हैं।
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इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट में मिलेंगी ये सुविधाएं
भारत-नेपाल के सोनौली कोतवाली क्षेत्र के केवटलिया में निर्माणधीन लैंडपोर्ट में टर्मिनल बिल्डिंग, नेपाल व भारत साइड पार्किंग/बस टर्मिनल, होटल, इंपेक्शन शेड कस्टम, सामान रखने, आयात-निर्यात के लिए वेयरहाउस, रेलवे टर्मिनल में आयात-निर्यात के लिए भवन, ट्रक पार्किंग, तोरण, ट्रक टोल, वेट ब्रिज, पैसेंजर टोल, फायर स्टेशन, मेंटिनेंस शेड, डिसपेंसरी, रेस्ट हाउस फार ड्राइवर, फ्लैग, एसआरवाई ब्रिज, सेंट्रल गार्डन, पैसेंजर टर्मिनल पर एलिवेटेड वॉकवे, वॉटर बॉडी, हेलीपैड, एनिमल शेड, क्वारंटीन ब्लॉक, आइसोलेशन ब्लॉक, एनिमल प्लांट कार्यालय, स्टाफ क्वार्टर, पब्लिक यूज बिल्डिंग, कस्तम एजेंट बिल्डिंग, वॉच टावर, पेट्रोल पंप आदि का निर्माण होगा।
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कोट
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्री टर्मिनल भवन होगा, जिसमें उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप सभी सुविधाएं होंगी। हाई स्पीड इंटरनेट, मेडिकल सुविधा, रेस्ट रूम, कैफेटेरिया की व्यवस्था होगी। कार्गो सुविधा, अत्याधुनिक वेयर हाउस भी होंगे, ताकि दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक सुविधाओं को बेहतरीन कर धन व समय की बचत की जा सके।
-जीएस संधू, निदेशक, लैंडपोर्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया
कोट
करीब दो साल में चेकपोस्ट का निर्माण पूरा होगा। इसमें सभी जांचें एक जगह होंगी। सोनौली कस्बे में जाम से मुक्ति मिल जाएगी। वाहनों को पास कराने में कम समय लगेगा। पर्यटकों को काफी सहूलियत मिलेगी। अत्याधुनिक उपकरणों से जांच होने से सुरक्षा मजबूत होगी। आईसीपी के बन जाने से दोनों देशों के बीच संबंधों, व्यापार व अन्य सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी