मिठौरा। क्षेत्र के ग्राम सभा सिंदुरिया में कथा के सातवें दिन पंडित माधव राज शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोपियों के साथ रासलीला, रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। माधव शास्त्री ने कहा की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से पति रुप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरा करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरुप प्रकट हो गए। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। संवाद